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कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में मंत्रीमंडल द्वारा ‘मिशन लाल लकीर’ लागू करने के लिए बिल लाने की मंजूरी

कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में मंत्रीमंडल द्वारा ‘मिशन लाल लकीर’ लागू करने के लिए बिल लाने की मंजूरी

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभागों के लिए साझे कैडर के विभाजन को भी हरी झंडी

Punjab Cabinet: चंडीगढ़। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में मंत्रीमंडल ने पंजाब आबादी देह (रिकार्ड का अधिकार) बिल, 2021 को विधानसभा के चल रहे बजट सत्र में लाने की मंजूरी दे दी है।

इसका उद्देश्य भारत सरकार के सहयोग से इसकी ‘स्वामित्व स्कीम’ अधीन मिशन लाल लकीर को लागू करने के उद्देश्य से गाँवों में लाल लकीर के अंदर आने वाली सम्पत्तियों का रिकार्ड तैयार करने और इन सम्पत्तियों सम्बन्धी पैदा हुए झगड़ों को निपटाने में राज्य सरकार की मदद करना है।

इसके अलावा यह कानून गाँव वासियों /मालिक को सम्पत्ति के मुद्रीकरण के अधिकार प्रदान करने और सरकारी विभाग /संस्था और बैंक द्वारा मुहैया करवाए जाते अलग-अलग लाभों का फ़ायदा लेने के लिए सुविधा प्रदान करेगा।

यह जि़क्रयोग्य है कि राज्य में ज़मीनों की मुरब्बाबन्दी के समय गाँवों में आबादी वाले स्थानों को लाल लकीर में रखा गया। लाल लकीर के अंदरूनी क्षेत्र के लिए कोई भी रिकार्ड तैयार या बनाया नहीं गया। लाल लकीर के अंदर किसी भी ज़मीन के स्वामित्व के लिए कब्ज़े को ही आधार मानते हुए मलकीयत दी गई थी। कुछ मामलों में चूल्हा टैक्स आदि के आधार पर रजिस्टरियाँ हुई हैं परन्तु ज़्यादातर मामलों में लाल लकीर में आने वाली सम्पत्ति के स्वामित्व को अनौपचारिक सामझौते आदि के माध्यम से मलकीयत हस्तांतरित की जाती है और कब्ज़े को ही स्वामित्व का आधार माना जाता है।

पंजाब विलेज कॉमन लैंड एक्ट में संशोधन को मंजूरी

मंत्रीमंडल ने पंजाब विलेज कामन लैंड (रैगूलेशन) एक्ट, 1961 की धारा 2 में संशोधन करने की मंजूरी दे दी है जिससे धारा 2(जी)(1) और धारा 2(जी)(4) के बाद उप धारा 4(ए) दर्ज करके गैर-कानूनी कब्जों से आबादी देह या लाल लकीर या गोराह देह के अंदर पड़ी खाली जमीनों की सुरक्षा की जा सके।

स्वास्थ्य और मैडीकल शिक्षा के साझे काडर के विभाजन को मंजूरी

एक अन्य फैसले में मंत्रीमंडल की तरफ से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और मैडीकल शिक्षा और अनुसंधान विभागों के साझे काडर के विभाजन को मंजूरी दी गई। इस कदम का मंतव्य कंट्रोलिंग अथारिटी और दोनों विभागों के नियमों को अलग करके इन दोनों विभागों के दरमियान स्थापति सम्बन्धी मामलों के साथ पैदा हुए विवादों का तुरंत हल करना है। इसके साथ ही 13 जनवरी, 2021 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता अधीन हुई अफसर कमेटी की मीटिंग में उभरी सहमति के मद्देनजर मंत्रीमंडल ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और मैडीकल शिक्षा और अनुसंधान विभाग के प्रचलित नियमों के दायरे से साझे काडर (मिनिस्टरियल, नर्सिंग और पैरा-मैडीकल) के पद हटाने को भी मंजूरी दे दी और यह पद मैडीकल शिक्षा और अनुसंधान विभाग को अलाट किये गये।

लाल फीताशाही विरोधी बिल को बजट सैशन में पेश करने की मंजूरी

लाल फीताशाही को खत्म करने और जनहित मामलों के प्रभावशाली प्रशासन को उत्साहित करने की कोशिश में मंत्रीमंडल की तरफ से ‘पंजाब ऐंटी रैड्ड टेप बिल -2021’ को विधान सभा के चल रहे बजट सैशन में पेश करने के लिए मंजूरी दी गई। सेवाओं को लोगों तक पहुँचाने और कारोबार को आसान बनाने के लिए सरकार के सुधार एजंडे के हिस्से के तौर पर इस बिल में आसान और विश्वसनीय प्रक्रियाओं के द्वारा नागरिकों और कारोबारों पर नियमों की लागत और बोझ को घटाने की व्यवस्था है जो प्रक्रिया में तेजी लायेगा और शासन को कुशल बनाऐगा। यह बिल सिस्टम की कमियों और लाल फीताशाही को दूर करके नागरिकों और कारोबार की सहायता के लिए प्रशासन की प्रणालियों में सुधार लाने में महत्वपूर्ण योगदान डालेगा। यह सरकारी व्यवस्थाओं के सरलीकरण, री-इंजीनियरिंग सरकारी प्रणाली, नियमों सम्बन्धी भार को घटाने और बाहरी मध्यस्थों को हटाने के लिए कई उपाय प्रदान करेगा जिससे नागरिकों और कारोबार की सहायता को यकीनी बनाया जायेगा।

इंजीनियरिंग कालेजों को अपग्रेड करके स्टेट यूनिवर्सिटी का दर्जा देने की मंजूरी

पंजाब मंत्रीमंडल द्वारा आज शहीद भगत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी और सरदार बेअंत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी को राज्य स्तरीय यूनिवर्सिटियों में अपग्रेड करने को मंजूरी दे दी गई।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह की अध्यक्षता अधीन हुई मंत्रीमंडल की मीटिंग के बाद एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि सम्बन्धित बिल विधान सभा के मौजूदा बजट सत्र में पेश किये जाएंगे।

बिल लागू होने से शहीद भगत सिंह स्टेट टैक्निकल कैंपस, फिरोजपुर और बेअंत कालेज आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलोजी, गुरदासपुर को क्रमवार शहीद भगत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी, फिरोजपुर और सरदार बेअंत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी, गुरदासपुर के तौर पर अपग्रेड किया जायेगा। इन इंजीनियरिंग कालेजों को राज्य की यूनिवर्सिटियों के तौर पर अपग्रेड करने से यह दोनों संस्थाएं अपने वित्तीय स्थिति में सुधार करने के साथ साथ आसपास के क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार अपने मौजूदा ढांचेे से बहु-विषयक कोर्स शुरू करने के योग्य हो जाएंगे।

तकनीकी शिक्षा मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने मंत्रीमंडल को बताया कि वित्त विभाग ने दोनों यूनिवर्सिटियों में से हरेक के लिए अगले 3 सालों के लिए 45 करोड़ रुपए (15 करोड़ रुपए/साल) की ग्रांट को मंजूरी दे दी है जिसको आई.आई.टी रोपड़ की तरफ से विद्यार्थियों को आकर्षित करने के लिए सीध दी जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 3 सालों बाद ग्रांट जारी रखने की समीक्षा की जायेगी।

राज्य सरकार की तरफ से 1994 में स्थापित की इन दोनों संस्थाओं ने पंजाब के सरहदी क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा के विकास में अहम भूमिका निभाई है। यह संस्थाएं सोसायटीज़ रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के अंतर्गत रजिस्टर्ड सोसायटियों की तरफ से चलाई जाती हैं और उनके सभी मामलों की देखरेख राज्य सरकार की तरफ से गठित बोर्ड आफ गवर्नरज़ द्वारा की जाती है।

पंजाब एग्रो फूडग्रेन कॉर्पोरेशन को 36.70 करोड़ रुपए जारी करने की मंज़ूरी

पंजाब कैबिनेट ने शुक्रवार को पंजाब एग्रो फूडग्रेन कॉर्पोरेशन को साल 2019-20 के रबी मंडीकरण सीजन के दौरान किये गए कामों के लिए प्रशासनिक खर्चों के तौर पर 36.70 करोड़ रुपए जारी करने की मंज़ूरी दे दी।

यह मंजूरी मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में आज शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा हुई मंत्रीमंडल की मीटिंग में दी गई।

मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता के अनुसार पंजाब फूडग्रेन कॉर्पोरेशन को रबी सीजन 2019-20 दौरान किये गए काम के बनते प्रशासनिक खर्चों का भुगतान बाकी की खरीद एजेंसियों पनग्रेन, पंजाब वेयरहाऊसिंग कॉर्पोरेशन और मार्कफैड को खरी$फ सीजन 2019-20 दौरान भुगतान किए गए चावलों के बदले प्राप्त हुए प्रशासनिक खर्चों में से वित्त विभाग की शर्तों के अनुसार जारी किया जाएगा।

खरीफ मंडीकरण सीज़न 2018-19 दौरान कॉर्पोरेशन का खरीद हिस्सा 10 प्रतिशत था जो खरीफ मंडीकरण सीज़न 2019-20 दौरान पनग्रेन को 4 प्रतिशत, मार्कफैड को 3 प्रतिशत और वेयरहाऊस कॉर्पोरेशन को 3 प्रतिशत हस्तांतरित कर दिया। इसके अनुसार फूडग्रेन कॉर्पोरेशन के प्रशासनिक खर्चों के लिए अनुपातिक हिस्से राशि 36.70 करोड़ रुपए बनती है।

राज्य की एजेंसियाँ जो भारत सरकार की ओर से गेहूँ और धान की फ़सल की खरीद करती हैं जिनको खऱीफ़ मंडीकरण सीज़न दौरान ही धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य का 2.5 प्रतिशत प्रशासनिक खर्च अदा किया जाता है। यह प्रशासनिक खर्च तब बँटा जाता है जब धान को चावलों में बदल दिया जाता है और चावल एफ.सी.आई. (भारत सरकार) को डिलीवर किया जाता है। यह खर्चा राज्य की खरीद एजेंसियों द्वारा साल में हुए खर्चे जैसे कि अमला, स्टॉक का रख-रखाव और अन्य प्रशासनिक खर्चे के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

पंजाब एग्रो फूडग्रेनज़ कॉर्पोरेशन को गेहूँ और धान की खरीद के लिए बतौर राज्य स्तरीय खरीद एजेंसी की इजाज़त दी थी। खरीद एजेंसियों द्वारा धान की कुल खरीद का तकरीबन 10 प्रतिशत हिस्सा पी.ए.एफ.सी ने खरीदा।

खरीद प्रक्रिया के बेहतर प्रबंधन को यकीनी बनाने के लिए राज्य सरकार ने खरीफ मंडीकरन सीज़न 2019-20 से पहले राज्य में खरीद एजेंसियाँ घटाने का फ़ैसला किया था। इसके अनुसार 2 जुलाई, 2019 को जारी पत्र अनुसार पंजाब एग्रो फूड ग्रेनज़ कॉर्पोरेशन से अनाज की खरीद का काम वापस ले लिया गया। इसलिए कॉर्पोरेशन को खरीफ मंडी सीज़न 2019-20 के लिए कोई प्रशासनिक खर्चा नहीं मिला था जिससे कॉर्पोरेशन की अलग-अलग अदायगियाँ जैसे कि स्टॉक का रख-रखाव, कजऱ्े के ब्याज का भुगतान और अन्य अमला और प्रशासनिक खर्चों आदि पर गलत प्रभाव पड़ा।

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