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Bitter cold

उफ ! बार-बार लौटती कड़कड़ाती ठंड

Bitter cold : लोहड़ी और मकर संक्रांति के पर्व पर यह माना जाता है कि अब ठंड के दिन लद गए हैं। हालांकि इस वर्ष कडक़ती की ठंड के तेवर जस के तस बरकरार हैं। हालात ऐसे हैं कि धूप निकलने से पारा कुछ चढ़ता है, लेकिन दूसरे दिन ही ठंड ऐसा प्रकोप दिखाती है कि पारा फिर नीचे की तरफ लुढकऩे लगता है। उत्तर भारत में एक बार फिर से कड़ाके की सर्दी लौट आई है। रविवार से चल रही बर्फीली हवाओं ने ठिठुरन को और बढ़ा दिया है। उत्तर भारत की सर्दी को दिल्ली के हालात से जाना जाता है, ऐसे में अगर राजधानी के तापमान को देखें तो मंगलवार सुबह 5.30 बजे दिल्ली के सफदरजंग और पालम इलाके में तापमान क्रमश: 5.8 डिग्री और 6.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से कम है।

वहीं सुबह 8.30 बजे सफदरजंग और पालम इलाके का तापमान क्रमश: 4.3 डिग्री और 5.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के हालात को देखें तो चंडीगढ़ में भी सामान्य से 4 डिग्री सेल्सियस तापमान कम दर्ज किया गया। चंडीगढ़ मौसम विभाग का कहना है कि पश्चिम विक्षोभ जोकि अभी सक्रिय था, वह निकल चुका है और सुबह एवं शाम के समय कोहरा छा सकता है। इसकी भी आशंका है कि कोहरे की वजह से रात के तापमान में दो से तीन डिग्री की गिरावट दर्ज की जाए। खैर, मौसम विभाग की भविष्यवाणी अपनी जगह है, लेकिन यह तो साबित है कि सर्दी ने इस बार रिकॉर्ड बना दिया है। अब वीरवार तक एक बार फिर से न्यूनतम तापमान में गिरावट होगी और वह पांच डिग्री तक पहुंच जाएगा। इस कारण ठिठुरन का अहसास ज्यादा होगा। इससे पहले एक जनवरी को न्यूनतम तापमान 1.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

Bitter cold : उत्तर भारत में बीते सप्ताह बारिश का दौर जारी रहा था इस कारण अधिकतम व न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी हुई थी। सात जनवरी के बाद से तापमान में गिरावट आने लगी है। अब बीते रविवार से पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं ने पूरे उत्तर भारत में ठिठुरन बढ़ रही है। सोमवार को न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि अधिकतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री कम 17.5 डिग्री रहा। देश के दूसरे राज्यों की बात करें तो राजस्थान के कई इलाकों में शीत लहर के लिए येलो अलर्ट जारी किये गए हैं। वहीं दिल्ली में न्यूनतम तापमान सात डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया तथा इसमें और गिरावट होने की संभावना है।

इधर, हरियाणा भी कड़ाके की ठंड का सामना कर रहा है। उत्तर प्रदेश में मौसम शुष्क बना हुआ है और हिमाचल प्रदेश में कई स्थानों पर तापमान शून्य से नीचे दर्ज किया गया। इस बार पिछले वर्षों की तुलना में हिमाचल के पहाड़ों पर जोरदार बर्फ गिरी है, इससे जहां सैलानियों की संख्या बढ़ी है वहीं कोरोना संक्रमण की वजह से पर्यटकों के न आने की मार झेल रही होटल इंडस्ट्री को भी फायदा हुआ है। हिमाचल प्रदेश के केलोंग और कल्पा में तापमान शून्य से नीचे दर्ज किया गया है, केलोंग शून्य से 10.3 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ राज्य का सबसे ठंडा स्थान रहा।

Bitter cold : मौसम विभाग के मुताबिक 15 जनवरी तक कड़ाके की ठंड बरकरार रहने वाली है। पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश व उत्तर भारत के अन्य इलाकों में अगले 4 दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। एक तरफ जहां उत्तर भारत में शीतलहर अपना प्रकोप दिखाएगी वहीं, दक्षिण में बारिश लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।

Bitter cold : मौसम विभाग की भविष्यवाणी है कि यहां 15 जनवरी तक बारिश, ओले गिरने और वज्रपात की आशंका है। ऐसा बंगाल की खाड़ी के ऊपर श्रीलंका तट से दूर साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण होगा। वहीं कश्मीर घाटी की बात करें तो श्रीनगर में तापमान शून्य से 0.2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया जो कि पिछले रात शून्य से 2.6 डिग्री सेल्सियस नीचे से ज्यादा है। घाटी में लोगों को ठंड से थोड़ी राहत मिली है क्योंकि ज्यादातर स्थानों पर न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, गुलमर्ग में न्यूनतम तापमान शून्य से 9.6 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। यह घाटी का सबसे ठंडा स्थान रहा।

बीते सप्ताह यहां पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में कई क्षेत्रों में गंभीर बर्फबारी हुई जिससे सामान्य जन-जीवन काफी प्रभावित हुआ। कई स्थानों पर हवाई और सडक़ यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुए। ठंड और शुष्क हवाओं के प्रसार के कारण न्यूनतम तापमान धीरे-धीरे उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में और गिरेगा। जाहिर है, मौसम के ये तेवर और अटखेलियां प्रकृति के उस स्वरूप अनुसार ही हैं जोकि प्रति वर्ष अपने होने का अहसास कराती है। बेशक, गर्मी को इतना दुष्कर नहीं समझा जाता, क्योंकि उससे बचाव के लिए इतने संसाधनों की जरूरत नहीं पड़ती, जितनी सर्दी के मौसम के लिए होती है।

इस बार ठंड इसलिए भी ज्यादा चुभ रही है, क्येांकि कृषि कानूनों के खिलाफ किसान दिल्ली की ठिठुरन भरी सर्दी में आंदोलन कर रहे हैं। बेशक, अब यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में है, ऐसे में किसानों को माननीय अदालत पर भरोसा करते हुए अपने घरों को वापस लौट जाना चाहिए। किसानों को अपने हक के लिए लडऩा चाहिए लेकिन मारक सर्दी से बचाव भी रखना है। इस आंदोलन में 70 से ज्यादा किसानों का विभिन्न वजहों से जीवन खत्म हो चुका है, इसमें एक वजह कड़कती ठंड भी है। मौसम किसी का हितैषी नहीं है, अगर हमारा स्वास्थ्य होगा तो हम हर लड़ाई लड़ सकेंगे।

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