बेजुबां होते दांपत्य संबंध : डॉ. स्वतन्त्र जैन
Thursday, November 15, 2018
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बेजुबां होते दांपत्य संबंध : डॉ. स्वतन्त्र जैन

बेजुबां होते दांपत्य संबंध : डॉ. स्वतन्त्र जैन

कोई भी मानव अपने आप में संपूर्ण नहीं होता अर्थात सभी मानव अपूर्ण होते हैं। केवल, उनको रचने वाला ईश्वर ही संपूर्ण होता है। और विवाह ‘दो अपूर्ण मानवों के बीच ऐसा पवित्र बंधन होता है जिसे केवल संपूर्ण ईश्वर ही संभव बनाता है तथा जो एक दूसरे के लिये असीम प्रेम, अटूट विश्वास अमिट श्रद्धा व भक्ति के सहारे ही जुड़ा रह सकता है। परन्तु क्या आजकल की युवा पीढ़ी सचमुच ही अपने वैवाहिक जीवन से सन्तुष्ट है? इसमें सोचने की क्या बात है? सीधा सा तर्क है कि यदि सन्तुष्ट होते तो तलाकों की संख्या लगातार बढ़ती ना जाती, कोर्ट-कचहरी में तलाक के केस लाखों की संख्या में पैंडिंग न होते और करोड़ों जोड़े मृतप्राय: बेजान से रिश्तों को यूं ही नहीं ढो रहे होते । ये चुप्पी से साधे रिश्ते-ये बेजुबां तलाक असल तलाक से भी ज्यादा आहत भरे, जहरीले व खौफनाक बन जाते हैं, जो बहुत से युगल जोड़े समाज के डर या बच्चों की वजह से ढोए जा रहे हैं।

इन मृत प्राय: से बेजान सम्बन्धों के पीछे जहांं कई सामाजिक कारण उत्तरदायी हैं तो मनोवैज्ञानिक कारण भी कम नहीं। लव मैरिज अर्थात प्रेम विवाह भी बहुत जल्दी अपने प्रेम की रंगत खो देते हैं, आखिर क्यों? प्रसिद्ध फैमिली कांसलर एवं मनोवैज्ञानिक जॉर्ज हार्टमैन इन बेजुबां तलाक से बदतर रिश्तों के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं कि ऐसे बहुत से मनोवैज्ञानिक कारण हैं जिन की वजह से दांपत्य सम्बनों में खटास आती है या दरार पड़ती है और प्रेम भरे संबंध कुछ ही समय में कटु संबंधों में बदल जाते हैं। इनमें दोनों के व्यक्तित्व, सोच, पसंद-नापसन्द, जीवन मूल्य एवं रूचियों में मतभेद का होना महत्वपूर्ण कारण हैं। पर इन सबके अलावा जब किसी के आत्म सम्मान व आत्म-विश्वास को लगातार चोट पहुंचती है या पहुंचाई जाती है तो कोई भी रिश्ता अधिक देर तक टिक नहीं सकता ।

किसी भी दांपत्य जीवन में पति-पत्नी के बीच जहां सौहार्दपूर्ण संबंध उन दोनों के बीच एक सकारात्मक एवं मधुर बॉंड का सूचक है तो यह भी सच है कि उनमें गैर सौहार्दपूर्ण संबंध एक-दूसरे पर काफी लंबे समय तक कुछ अस्वाभाविक एवं अवांछनीय नियंत्रण का परिणाम और सूचक भी है। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि कई दांपत्य जोड़ों में यह संघर्ष एवं एक-दूसरे पर नियंत्रण रखने की भावना ही सबसे अधिक मुश्किल एवं परेशानी पैदा करने वाले पहलुओं में से एक हो सकता है। इसके अलावा बहुत सी ऐसी छोटी-छोटी बातें होती हैं जिनको एक-दूसरे की नजऱ से देखऩे का प्रयास करें तो सौहार्दपूर्ण रिश्ते की ओर कदम बढ़ाने में सफल हो सकते हैं। परन्तु इस लेख में आप निम्न दिये गये परीक्षण द्वारा अपने-अपने रिश्ते को आंकने का प्रयास करें।

नोट: कृपया आप अपने व अपने जीवन-साथी के बीच छोटे-बड़े असहमति क्षेत्रों को इंगित करने का प्रयास करें। नीचे दिये हुए विभिन्न पहलुओं पर आप स्वयं को 5 प्वाइंट स्केल पर कैसे रेट करते हो? अर्थात जो कथन आपको अपने बारे हमेशा सही लगता है उसको 4 अंक, प्राय सही लगता है तो 3 अंक, कभी-कभी सही तो 2 अंक, प्राय: गलत तो 1 अंक और हमेशा गलत लगता है तो 0 अंक दें।

1. मुझे अपने जीवन-साथी की सभी बात माननी पड़ती है:
2. मेरा जीवन साथी ऐसे विषयों पर बात करने से बचता है जो मेरे लिये महत्वपूर्ण है
3. मेरा जीवन साथी छोटी-छोटी बातों पर भी मुझसे सहमत नहीं होता/होती
4. मैं अपने साथी सेे ओवरलोडिड महसूस करता हूं
5. मेरा साथी हमेशा मुझपर हावी होने की कोशिश करता है जबकि मेरी प्रवृति उसकी बात मानने की होती है:
6. मेरे अपने लिये अति महत्वपूर्ण बातों के मनवाने में भी मुझे बहुत मुश्किल होती है।
7. मेरे साथी की कंट्रोल करने एवं अपनी ही मन-मरजी करने की पुरानी ज़रूरत है:
8. मेरा साथी मुझे कंट्रोल करने की कोशिश में रहता है:
9. हम दोनों में से अध्कितर मेरे साथी ही तय करते हैं कि किसका निर्णय माना जाएगा:
10. विरोध/लडाई वाली स्थिति के समाधन के लिये आप कितनी बार सक्रिय पहल करते हैं:
11. क्या आप अपने रिश्ते मेें आवश्यक पारस्परिकता की भावना का अहसास करते है?
12. क्या आप इतने निराश हो जाते हैं कि आप पर मानसिक दबाव बढ़ता जाता है?
13. क्या आपको कभी भी यह लगा कि आपके साथी ने अपनी मन-मरजी चलाने की ज़रूरत को पूर्ण करने के लिये ही आपसे विवाह किया ?
14. मुझे लगता है कि मेरे साथी की यह ज़रूरत है कि वह लगभग सभी बातों पर मेरी सहमति कराए:
15. क्या आपके साथी को आप पर कुछ नियंत्राण छोड़कर मध्य मार्ग अपनाने में मुश्किल होती है?
16. क्या आपका साथी आपकी बातों या मांगों से प्राय: इतना बौखला जाता है
17. कि वह या तो उससे बचकर भाग जाने की सोचता है या विरोध करने की
18. मुझे लगता है कि मेरा साथी ज़रूरत से ज्यादा अभिभूत हो जाता है
19. बहुत लम्बे समय तक अपनी ज़रूरतें पूर्ण न होने के कारण क्या आपको अपूर्णता का अहसास होता है जिस की वजह से आप निराश, नाराज़ व चिड़चिड़े रहते हैं ?
20. जब मैं अपने दाम्पत्य सम्बन्धें में अपनी ज़रूरतो के लिये खड़े होने का प्रयास करता हूं तो मेरा साथी अत्यन्त क्रोधित हो जाता है?
नोट: निम्न प्रश्नों का उत्तर हां या नहीं में दें।
21. मुझे लगता है कि हमारी समस्याएं इतनी पुरानी व उलझ सी गई हैं कि उनको दोहराना ऊब भरा लगता है?
22. क्या आपके नियन्त्रिात करने वाले साथी को कभी भी यह अहसास होता है कि इस तरह के जीवन से दाम्पत्य सम्बन्धें की उर्जा समाप्त सी हो गई है और इस लिये इस बंध्न से मोह भंग हो गया है?
23. क्या हमेशा आप ही बिना पारस्परिक्ता की आशा के समझौता करते हैं ?
24. क्या आपको लगता है कि अनुपालन करना केवल एक-तरफ पहुंच है?
25. क्या आपको लगता है कि आपका साथी आपके द्वारा किये गये समझौतों के महत्व को बहुत कम मान देता है?
26. क्या आपको लगता है कि दोनो ही पति-पत्नी ने इस दाम्पत्य संबंध पर अपना प्रभाव डालना छोड़ दिया है?
27. क्या इक्कठा रहने के बावज़ूद आप दोनों अधूरापन महसूस करते हैं?
28. क्या आपको अपने रिश्ते की दीर्घकालिक जीवनी शक्ति और व्यव्हारिकता को बचाने के लिये एक सुधरात्मक कार्य योजना की ज़रूरत महसूस होती है?
29. मेरे साथी ने कभी भी मुझे बदलने की कोशिश बिना कुछ मतभेदों को सहन करने का प्रयास नहीं किया:
30. क्या आप आहत/चोटिल होने के बावजू़द अपने साथी की बातों को मान जाते हैं?
31. आप दोनों के बीच ऐसे कौन-कौन से मतभेद हैं जिनका समाधान न किया जा सकता हो?
सैक्स, घरेलु कार्य, आज़ादी/अटानॉमी, आर्थिक सुरक्षा, निर्णय लेने की स्वतन्त्रता
32. अपने तनाव के लिये जिम्मेवार निम्न दिये गयेे क्षेत्रों को इंगित करें जिनके कारण आप अपने आप को बरबाद महसूस करते हैं:
घरेलु काम-काज, सैक्स, सास-ससुर की दख़लांदाजी, आर्थिक असुरक्षा, बच्चे, निर्णय लेने की स्वतन्त्रता, नौकरी, सभी के सभी
अधिकतम स्कोर : 100
न्यूनतम स्कोर ज़ीरो
60 से अधिक स्कोर वालों को कॉसलिंग की ज़रूरत है।

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