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Baby girl organ donation

मरकर भी जिन्दा है यह नन्ही बच्ची, जाते हुए जिंदगियां बांट गई

Baby girl organ donation : कई लोग जिन्दा रहते हुए भी एक-दूसरे के काम नहीं आते हैं और कुछ लोग ऐसे होते हैं जो मरकर भी लोगों के काम आ जाते हैं| धन्य हैं ऐसे लोग, ये लोग मरकर भी कभी नहीं मरते| ये किसी न किसी रूप में अपनी गाथा को सदा जीवंत रखते हैं| ऐसे बहुत से वाक्यांश आपने देखे और सुने होंगे जिनमें कोई दुर्घटना का शिकार हो जाता हैं और उसके बाद वह मरकर अपने अंगों से किसी की जिंदगी को रोशन कर जाता है| दिल्ली से भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है| यहां एक 20 महीने की बच्ची मरने के बाद तीन लोगों को जिंदगी दे गई और दो लोगों की अंधेरी जिंदगी में उजाला भर गई| इस बच्ची के दुनिया में आने और रहने का समय भले ही बेहद कम रहा हो लेकिन इतने समय रहने के बाद बच्ची जिस हिसाब से किसी और के लिए जीवनदायनी बनी उसने उसे अनेक रूपों में जीवंत कर दिया| बच्ची का नाम धनिष्ठा है|

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धनिष्ठा के पिता के अनुसार, उनकी बच्ची के साथ 8 जनवरी को दुर्घटना घट गई थी| बच्ची घर के फर्स्ट फ्लोर की बालकनी से नीचे गिर गई थी| उसके सिर में चोट आई थी, लेकिन एक बूंद भी खून नहीं निकला था। उसके बाकी शरीर में कहीं चोट नहीं थी।धनिष्ठा को अस्पताल लाया गया| यहां पर डॉक्टर ने उसका सीपीआर किया, ऑक्सीजन दिया और बाकी इलाज किया। बाद में धनिष्ठा को सर गंगाराम अस्पताल रेफर किया गया| यहां के डॉक्टरों ने बताया कि धनिष्ठा के सिर के अंदर ब्लीडिंग हुई हैं और इस वजह से उसका ब्रेन काम नहीं कर रहा है|इसी बीच 11 जनवरी डॉक्टरों ने सारी कोशिश करके धनिष्ठा को ब्रेन डेड घोषित कर दिया| जिसके बाद हमारी हंसती-खेलती दुनिया एकदम से उजड़ गई| हमारी धनिष्ठा हमसे दूर चली गई|

ऐसे ही नहीं लिया उसके अंगदान का फैसला…

धनिष्ठा के पिता ने बताया कि वह जितने दिन अस्पताल में रहे उन्होने वहां पर लोगों को किसी न किसी अंग की कमी के चलते तड़पते हुए देखा| उनका और उनके परिजनों का भयंकर दर्द महसूस किया| इस बीच मन में विचार आया कि बच्ची तो अब लौट कर आने वाली नहीं| क्यों न उसकी वजह से किसी की जिंदगी उजागर हो जाए| पर मेरे और धनिष्ठा की मां के लिए यह फैसला बहुत मुश्किल था… लेकिन फिर हमने ये सोचकर फैसला ले लिया कि बच्ची का तो अंतिम संस्कार हो जाएगा और उसके अंग खत्म ही हो जायेंगे लेकिन इसी के साथ उन लोगों की जिंदगी भी ख़त्म हो जाएगी जिन्हे ऑर्गन की जरूरत है| ऐसे में अगर उनकी बच्ची की वजह से औरों की जिंदगी बचती है तो इससे ज्यादा बड़ी बात और क्या हो सकती है| अब हमारी बच्ची न होकर भी कहीं हैं किसी रूप में| बतादें कि धनिष्ठा देश की सबसे कम उम्र की डोनर बन गई है। इससे पहले सूरत का ढाई साल का बच्चा सबसे कम उम्र का डोनर था।

तीन को मिली नई जिंदगी, दो की आँखों में रोशनी….

सर गंगाराम अस्पताल प्रशासन ने बताया कि बच्ची (Baby girl organ donation) का हार्ट, लीवर, दोनों किडनी और दो कॉर्निया डोनेट किया गया। अपोलो अस्पताल में एक बच्चे में हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया। जबकि लिवर आईएलबीएस अस्पताल में एक बच्चे में ट्रांसप्लांट किया गया। वहीं, गंगाराम अस्पताल में एक अडल्ट को धनिष्ठा की दोनों किडनी लगाई गई। चूंकि बच्ची की किडनी का साइज कम था, इसलिए दोनों किडनी मिलाकर एक अडल्ट में लगाया गया। इससे तीन लोगों को नया जीवन मिल गया। वहीं, बच्ची के कॉर्निया से अब दो लोगों की आंखों को नई रोशनी मिलेगी और उनकी जिंदगी भी संवर जाएगी। डॉक्टर ने कहा कि इतनी छोटी उम्र की बच्ची की बॉडी से ऑर्गन निकालना और इसे दूसरे में ट्रांसप्लांट करना भी एक चुनौती थी, लेकिन ये सबकुछ सफल रहा|

 

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