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डेढ़ दशक इनेलो के अध्यक्ष रहे अशोक अरोड़ा ने उतारी ऐनक

परिवार में बिखराव से ही चौटाला के हनुमान का हो गया था मोहभंग

पंजाबी समुदाय को लामबंद करने के लिए चौटाला ने खेला था दांव

चंडीगढ़। इंडियन नेशनल लोकदल ने जिस अशोक अरोड़ा को लगातार सातवीं बार अध्यक्ष बनाने के लिए पार्टी का संविधान बदला उन्होंने भी मंगलवार को इनेलो को अलविदा कर दिया। अशोक अरोड़ा द्वारा का इस्तीफा इनेलो के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका है। अरोड़ा कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं जिसकी औपचारिक घोषणा कल होने की संभावना है।

अरोड़ा चौटाला सरकार में परिवहन मंत्री रहे हैं। उनकी गिनती पूर्व सीएम ओपी चौटाला के सबसे नजदीकियों में होती रही है। इनेलो पार्टी व परिवार पर जब भी संकट आया तब-तब अरोड़ा ने आगे बढकऱ स्थिति को संभाला। इनेलो टूटने और दुष्यंत चौटाला द्वारा जननायक जनता पार्टी का गठन करने के बाद भी अरोड़ा इनेलो के साथ ही डटे रहे। परिवार में बिखराव के साथ ही अरोड़ा का पार्टी से मोहभंग हो गया था।

कलह के चलते अरोड़ा ने भी दोनों परिवारों को एकजुट करने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो सके। अरोड़ा के पार्टी छोडऩे की अटकले लंबे समय से चल रही हैं। लोकसभा चुनाव के बाद अरोड़ा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था लेकिन पहले चौटाला ने उसे अस्वीकार कर दिया और कुछ दिन बाद नाटकीय घटनाक्रम में अरोड़ा को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में लेकर प्रदेश में पार्टी की कमान बीडी ढालिया को सौंप दी।
अरोड़ा ने न केवल इनेलो को नई पहचान दिलाई बल्कि गैरजाट लोगों में भी पार्टी को खड़ा किया। अरोड़ा की पहचान चौटाला के हनुमान के रूप में होती थी। अरोड़ा की गिनती प्रदेश में वरिष्ठतम पंजाबी नेताओं में होती है। इनेलो नेतृत्व व नेताओं के बीच भले ही विवाद होते रहे हैं लेकिन अरोड़ा कभी विवादों में भी नहीं रहे। सूत्रों के अनुसार हुड्डा के साथ अरोड़ा की बातचीत पहले भी कई बार होती रही है। अभी तक वह कांग्रेस में शामिल होने का फैसला इसलिए भी नहीं कर पा रहे थे क्योंकि राज्य में पार्टी की कमान डॉ. अशोक तंवर के हाथों में थी।

हरियाणा कांग्रेस में हुई बदलाव के बाद अरोड़ा ने भी बदलाव का मन बना लिया। सूत्रों का कहना है कि पार्टी के हरियाणा मामलों के प्रभारी गुलाम नबी आजाद भी अरोड़ा को पार्टी में शामिल करवाने की मंजूरी दे चुके हैं। पूर्व सीएम हुड्डा के एक करीबी ने इस बात की पुष्टि की है कि अरोड़ा का कांग्रेस में आना तय है। माना जा रहा है कि अरोड़ा को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में ज्वाइन करवाया जाएगा। पार्टी के हरियाणा मामलों के प्रभारी गुलाम नबी आजाद, प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा और पूर्व सीएम हुड्डा की मौजूदगी में वे कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करेंगे।

अब तक चौदह विधायक व एक सांसद छोड़ चुके हैं इनेलो

वर्ष 2014 में हुए विधानसभा चुनावों में इनेलो के 19 उम्मीदवार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इनेलो के चार विधायक नैना चौटाला, राजदीप फौगाट, अनूप धानक व पिरथी नंबरदार इस्तीफा देकर दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व वाली जेजेपी ज्वाइन कर चुके हैं। वहीं 10 विधायकों ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा ज्वाइन की है। इसके अलावा एक राज्यसभा सांसद भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। वर्तमान में अभय के साथ लोहारू विधायक ओमप्रकाश बरवा और बरवाला विधायक वेद नारंग ही बचे हैं।

अरोड़ा के साथ कुरुक्षेत्र में हुआ इनेलो का सफाया

कुरुक्षेत्र। अपने समर्थकों के साथ इनेलो के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने पार्टी से त्यागपत्र दे दिया है। पंजाबी धर्मशाला में थानेसर हलके के इनेलो कार्यकर्ताओं तथा अरोड़ा समर्थकों की बैठक में रुंधे गले से भावुक होते हुए अरोड़ा ने कहा कि चौधरी ओम प्रकाश चौटाला ने उन्हें अपने बेटों से ज्यादा प्यार दिया और जो मान सम्मान पार्टी व थानेसर हलके की जनता ने दिया वे उसका अहसान कभी नहीं चुका सकते। अरोड़ा ने जब त्यागपत्र देने का ऐलान किया तो उनका गला भर आया और आंखों से आंसू बह निकले। अरोड़ा ने कहा कि वह अपने हलके की जनता और कार्यकर्ताओं का ऐहसान कभी नहीं उतार सकते और चौधरी ओम प्रकाश चौटाला ने उन्हें दुकान से उठाकर विधानसभा तक भेजा। इस हलके की जनता ने चार बार विधायक बनाया। इसके लिए वे हमेशा चौटाला परिवार व थानेसर हलके की जनता के अहसानमंद रहेंगे। अरोड़ा ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि चौटाला परिवार में आपसी फूट के कारण पार्टी आज इस हालात में पहुंच गई है कि लोकसभा चुनाव में पार्टी की जो दुर्दशा हुई वह किसी से छिपी हुई नहीं है। वह इनेलो छोडऩा नहीं चाहते थे लेकिन कार्यकर्ताओं व थानेसर हलके के विकास के लिए उन्होंने इनेलो से त्यागपत्र दे दिया। अरोड़ा ने कहा कि वे ओम प्रकाश चौटाला से मिलकर नई राजनीतिक पारी शुरू करने के लिए उनका आशीर्वाद लेंगे और माफी भी मांगेंगे।

अशोक अरोड़ा के समर्थन में इनेलो के जिला प्रधान संदीप टेका, हलका प्रधान व बूरा खाप के अध्यक्ष रणबीर सिंह बूरा, शहरी प्रधान विवेक मैहता विक्की, प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य रामस्वरूप चोपड़ा, पूर्व सदस्य नरेंद्र शर्मा निंदी, हलका प्रवक्ता सुरेंद्र सैनी, एससी प्रकोष्ठ के जिला प्रधान चंद्रभान बाल्मीकि, जिला उपप्रधान सतबीर शर्मा सहित अनेक पदाधिकारियों ने इनेलो से त्यागपत्र देने का ऐलान किया।

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