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54 साल से पाक की जेलों में हैं और भी अभिनंदन

गुरदासपुर। पाकिस्तान पर भारत सरकार के अंतरराष्ट्रीय दबाव से तीन दिन में विंग कमांडर अभिनंदन की वतन वापसी हो गई थी। इस खुशी के साथ ही 54 साल से पाकिस्तान की जेलों में बंद युद्ध बंदियोंं के परिवारों का दर्द और छलक उठा। जिले के गांव बरनाला के वीर सपूत सुजान सिह के परिवार ने अभिनंदन की रिहाई पर खुशी व्यक्त करने के साथ ही सरकारो के प्रति रोष व्यक्त करते कहा, यदि ऐसी गंभीरता बाकी कैदियों के मामले में दिखती तो अब तक वह घरों में होते।

1965 के भारत-पाक युद्ध के सिपाही सुजान सिंह के भाई महिदर सिंह व भाभी कौशल्या देवी ने नम आंखों से बताया कि सुजान को छंभ जोडिय़ां के देबा बटाला सेक्टर में पाक सेना ने बंदी बना लिया था। वार खत्म होने की घोषणा के बाद जब भाई लौटा नहीं तो परिवार को किसी अनहोनी का भय सताने लगा। सबसे अधिक मानसिक तौर पर हताश सुजान सिंह की नई नवेली दुल्हन तारो देवी हुई। जिसके हाथों की मेहंदी व लाल चूड़े का रंग भी फीका नहीं हुआ था कि सुजान सिंह के पाकिस्तान जेल में बंद होने की जानकारी 1970 में उस (सुजान) द्वारा भेजी चिट्ठी से मिली। इसके बाद 6 जुलाई 1970 को अमृतसर के गांव साहोवाल के दो कैदी रफीक मसीह व फकीर सिंह पाक जेल से रिहा होकर वतन लौटे तो उन्होंने अमृतसर में जेल सुपरिटेंडेंट को लिखित रुप में बताया कि भारतीय सेना के 14 फील्ड रेजीमेंट के वायरलेस आपरेटर सुजान सिंह सियालकोट (पाकिस्तान) जेल के इंटेरोगेशन सेल में बंद है तथा उस पर जुल्म ढाए जा रहे हैं। इसके बाद रेडियो संदेश में खुद सुजान ने भी पाक जेल में बंद होने की पुष्टि की।

राखी का त्योहार आने पर जब बहन प्रकाशो देवी व मेलो देवी ने सुजान सिंह को राखी भेजी तो राखी पाकिस्तान से वापस आ गई। जिससे दोनों बहनों व पूरे परिवार को गहरा सदमा पहुंचा। महिदर सिंह व कौशल्या देवी ने बताया कि कुछ समय पहले भाई के गम में दोनों बहनों का भी निधन हो गया।सुजान सिंह को बिछड़े हुए 54 साल का समय गुजर चुका है। लेकिन अब तक उनको उम्मीद है कि वह वतन जरूर लौटेगा। परिवार की चौथी पीढ़ी शुरू हो चुकी है, मगर 1965 से कोई भी सदस्य राखी का त्योहार नहीं मनाता। परिवार के नौजवान व बुजुर्ग चाहते हैं कि यह त्योहार सुजान सिंह के साथ मिलकर मनाएंगे।

बेटे की याद में मां भी गुजर गई

पाक जेल में बंद सुजान सिंह की मां संतो देवी ने 25 साल तक एक टाइम का खाना खाकर बेटे का बेसब्री से इंतजार किया तथा सरकार से पेंशन भी नहीं ली। बेटे के वतन वापसी के इंतजार में उनका भी निधन हो गया। सुजान सिंह का परिवार पाक की इमरान खान सरकार से अपील करता है कि 54 युद्धबंदियों के परिवारों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उनकी रिहाई की जाए।

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