Wednesday, September 18, 2019
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क्या पंजाब में फिर से दहशत का माहौल पैदा करने की कोशिशों हो रही हैं ?

सुमित्रा की रिपोर्ट

पंजाब में क्या फिर से दहशत का माहौल बनाने की कोशिशें की जा रही हैं? क्या इन कोशिशों में पकिस्तान की कोई भूमिका है? क्या खालिस्तान समर्थक आतंकी आईएसआई के इशारे पर काम कर रहे हैं? क्या पंजाब की शान्ति फिर से खतरे में है? यह कुछ ऐसे सवाल हैं, जिन को लेकर चर्चा चल पड़ी है। यह चर्चा अमृतसर में हैंड ग्रेनेड मिलने के बाद शुरु हुई है। हालांकि, राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर पुलिस पहले ही चौकस है, लेकिन हाल की घटनाओं को देखते हुए पुलिस को और ज्यादा चौकस होने की जरूरत है।

पंजाब में आतंकी हमले के इरादे से नकाबपोश लोगों की तरफ से फेंके गए हैंड ग्रेनेड पकिस्तान से भेजे गए थे। यह ग्रेनेड भीड़भाड़ वाले इलाके में फेंक कर धमाका किया जाना था। इस आंतकी कार्रवाई को पाकिस्तान में शरण लिए खालिस्तानी आतंकी आईएसआई के इशारे पर अंजाम दिया जाना था। पुलिस का मानना कि पंजाब में आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए खालिस्तानी फिर से सक्रिय हो गए हैं।
कानून-व्यवस्था को भंग करने के इरादे से पंजाब में ऑपरेशन ब्लू स्टार की 35वीं बरसी पर धमाका करने की योजना थी। अमृतसर के गांव हर्षाछीना-कुकडांवाला में पाकिस्तान से भेजे दो हैंड ग्रेनेड मिलने से इसका खुलासा हुआ है। दो बाइक सवार नकाबपोशों की ओर से फेंके गए बैग से यह दोनों हैंड ग्रेनेड बरामद किये गए हैं। यह पाकिस्तान से आये थे।

पुलिस ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान में शरण लेने वाले खालिस्तानी संगठनों के इशारे पर काम कर रहा खालिस्तानी आतंकी हैप्पी पीएचडी हैंड ग्रेनेड से गुरु नगरी में आतंकी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी की वजह से यह साजिश नाकाम कर दी गई है।

अमृतसर (देहात) पुलिस के एसएसपी विक्रमजीत दुग्गल के मुताबिक बाइक सवार दोनों आतंकियों ने भीड़भाड़ वाले इलाके में धमाके की योजना बनाई थी। दुग्गल के अनुसार दोनों आतंकियों की हरकत सीसीटीवी में कैद हो चुकी है। बैग से मिले फोन नंबरों व सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला जा रहा है। आतंकियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जायेगा।

बाइक पर सवार इन दोनों युवकों ने अपने मुंह ढके हुए थे। नाके पर खड़ी पुलिस ने अजनाला की तरफ से आ रहे इन युवकों को रुकने का इशारा किया तो ये भागने लगे। पुलिस ने बाइक के पीछे बैठे एक युवक को पकडऩे की कोशिश की तो वह बैग फेंक अपने साथी के साथ भाग गया। हैंड ग्रेनेड मिलने के बाद पुलिस नेऑपरेशन ब्लू स्टार की 35वीं बरसी को ले कर प्रदेश भर में कड़े सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।

पुलिस की मुस्तैदी की वजह से आतंकी घटना टल गई, लेकिन इसके अर्थ यह नहीं लगाए जाने चाहिए कि फिर से आतंकी कार्रवाई की कोशिशें नहीं होंगी। पुलिस को दहशतगर्दों की पहचान कर जल्द से जल्द उन्हें गिरफ्तार करना चाहिए, ताकि उन ताकतों का पता लगाया जा सके, जो इन मोहरों को आगे कर अपनी मनचाही करना चाहती हैं।

निरंकारी भवन में भी हो चुका है ब्लास्ट :

इससे पहले अमृतसर में निरंकारी भवन में भी सत्संगियों पर बम फेंका जा चुका है। ब्लास्ट की घटना को भी पंजाब में फिर से आतंकवाद की शुरुआत के तौर पर देखा गया था। 1978 में पंजाब में आतंक की शुरुआत तब निरंकारियों पर हमले से ही की गई थी। चालीस साल बाद हुए आतंकी हमले में एक बार फिर से निरंकारी ही उनके निशाने पर थे।

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बम ब्लास्ट की घटना को आतंकवादी हमला तो माना था, इसमें पाक ख़ुफिय़ा एजेंसी आईएसआई का हाथ होना भी स्वीकार किया है, लेकिन इस घटना को चालीस साल पहले हुए निरंकारियों पर हमले से जोड़ कर देखे जाने पर उन्होंने असहमति जताई थी। यह भी मान लिया गया है कि इस हमले के मास्टरमाइंड खालिस्तानी आतंकी पाकिस्तान में आईएसआई की शरण में बैठे हैं। इस बात को स्वीकार करने में भी पंजाब सरकार को कोई ऐतराज नहीं है कि आईएसआई के इशारे पर ग्रेनेड हमले का मकसद पंजाब में दहशत फैलाना था।

लेकिन इसका जवाब किसी के पास नहीं है कि पंजाब में बार-बार के अलर्ट के बावजूद आतंकवादी हमला करने में कामयाब कैसे हो जाते हैं? अमृतसर जिले के अदलीवाल गांव के निरंकारी भवन पर हुए इस हमले में तीन लोग मारे गए और बीस लोग जख्मी हुए। हमले से समय निरंकारी भवन में 250 से ज्यादा लोग प्रवचन सुन रहे थे।

आतंकियों को बख्शे नहीं जाने की पंजाब सरकार की चेतावनी के बीच हमले के दोनों आरोपियों बिक्रमजीत सिंह और अवतार सिंह को गिरफ्तार भी कर लिया गया। पुलिस जांच-पड़ताल से इतना तो साफ़ हो ही गया है कि आतंकवाद के दौर में भी खालिस्तानी संगठन पंजाब में इसी तरह के ग्रेनेड का इस्तेमाल करते थे और अब एक बार फिर वही तौर-तरीके अपनाते हुए सक्रिय हो गए हैं।

आईएसआई ने इतना बदलाव जरूर किया है कि अब किसी भी वारदात को अंजाम देने के लिए रेकी कोई करता है, जबकि हमले के लिए इस्तेमाल किसी दूसरे को किया जाता है। रेकी करने वाले और हमला करने वाले एक-दूसरे को जानते भी नहीं हैं। इसके लिए बेरोजगार युवकों को टारगेट बनाया जाता है और पैसे का लालच दे कर उन्हें हमले के लिए तैयार किया जाता है। लोगों में दहशत फ़ैलाने के लिए मौजूदा दौर में हथियारों के बजाये हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल ज्यादा किया जाने लगा है।

मकसूदां थाना क्षेत्र में भी हो चुके हैं ब्लास्ट :

पंजाब में जालंधर जिले के मकसूदां थाना क्षेत्र में भी इसी तरह एक के बाद एक चार ब्लास्ट हुए थे। वहां भी ब्लास्ट में मोटर साईकिल पर आये आतंकी सवारों का ही हाथ था। निरंकारी भवन पाए ग्रेनेड हमले से इस आशंका की भी पुष्टि हो गई है कि पिछले कुछ वर्षों से पकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन पंजाब में पैर पसारने के लिए जोर-शोर से सक्रिय हो गए हैं। कश्मीर में फ़ौज पर हमले के लिए भी इन दिनों ऐसे ही ग्रेनेड इस्तेमाल किये जा रहे हैं। यह हैंड ग्रेनेड पकिस्तान की ही आर्डिनेंस फ़ैक्टरी में तैयार किया गया था। इंटेलीजेंस के पास भी इस तरह की खबर थी कि सीमा पार से हैंड ग्रेनेड की खेप आई थी। जैसा कि अक्सर होता है, हमले के बाद देशभर में निरंकारी भवनों की सुरक्षा बढ़ा दी गई। इसके साथ ही पंजाब में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की शाखाओं की सुरक्षा भी बढ़ाई गई। सार्वजानिक स्थानों, जहां लोगों की आवाजाही ज्यादा रहती है, वहां भी विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए।

रिपोर्ट में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने की कोशिश का जिक्र :

अमृतसर जिले में राजासांसी क्षेत्र के अदलीवाल गांव में बम ब्लास्ट की घटना से आठ महीने पहले आतंकी हमले की रिपोर्ट मिल गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय को दी गई रिपोर्ट में दर्शाया गया था कि पंजाब में आतंकवाद को फिर से पुनर्जीवित करने की तैयारी की जा रही हैं। इसके लिए आतंकी संगठन इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिये सिख युवकों से संपर्क करने में लगे बताये गए थे। केंद्रीय सशस्त्र बल और आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों के दस्तावेजों में दर्ज है कि लंबे समय से पकिस्तान में सिख आतंकी संगठनों की सक्रियता देखी जा रही है।

यह रिपोर्ट 19 मार्च को संसद में पेश की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि आतंकी संगठन कट्टरता का प्रचार कर रहे हैं और आने वाले दिनों में यह एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। रिपोर्ट में हमले के मकसद से आईएसआई की तरफ से सिख युवकों को अपने ठिकानों पर आतंकी ट्रेनिंग देने का भी जिक्र किया गया था। इतने सब के बावजूद आतंकी हमला कर पंजाब में लोगों के बीच दहशत पैदा करने के अपने मंसूबों में सफल हो गए। बहरहाल, अमृसतर में बम ब्लास्ट की जांच एनआईए की तरफ से की जा रही है। एनआईए की तीन सदस्यीय टीम की जांच के बाद कुछ नए तथ्य सामने आने की संभावना है।

रिपोर्ट कहती है कि पंजाब के बॉर्डर से लगते जिलों में आतंकियों ने पिछले कुछ समय में अपने स्लीपर सेल्स को फिर से सक्रिय किया है। यह भी साफ़ हो चुका है कि पंजाब में सक्रिय आतंकवादियों ने अपने संबंध कश्मीरी आतंकियों के साथ बढ़ा लिए हैं।

अदलीवाल गांव में निरंकारी भवन पर हमले का मास्टरमाइंड हरमीत सिंह पीएचडी उफऱ् हैप्पी पकिस्तान में बैठा है। आईएसआई की मदद से हैप्पी ने ही ग्रेनेड हमला करवाया था। हैप्पी खालिस्तान लिबरेशन फ़ोर्स (केएलएफ) का चीफ है। अब जो दो हैंड ग्रेनेड मिले हैं, उनमें भी पाकिस्तान में शरण लेने वाले खालिस्तानी संगठनों के इशारे पर काम कर रहे खालिस्तानी आतंकी हैप्पी पीएचडी का ही नाम सामने आ रहा है। आतंकवाद के दौरान पंजाब ने लगातार बीस साल तक बड़ी कीमत चुकाई है, इसलिए पाक सीमा से सटे इस राज्य के विकास के लिए शान्ति का बना रहना बेहद जरूरी है और इसका सारा दारोमदार पंजाब पुलिस पर है।

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