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अमरिंदर ने छह विधायकों को सलाहकार नियुक्त करके सरकारी खजाने पर डाला बोझ : शिअद

चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल ज(शिअद)ने छह विधायकों को सीएम का सलाहकार नियुक्त किये जाने तथा उन्हें राज्य मंत्रियों का दर्जा देकर सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ डालने के लिए कांग्रेस सरकार की निंदा की है।

शिअद के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने आज यहां पत्रकारों से कहा कि एक तरफ तो कांग्रेस सरकार समाज के सभी वर्गों को सुविधाएं तथा लाभ देने से बच रही है तथा दूसरी तरफ पांच विधायकों को सलाहकार नियुक्त करके कैबिनेट मंत्रियों का दर्जा दे दिया है और एक विधायक को सलाहकार बनाकर राज्य मंत्री बना दिया है।

उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि कांग्रेस का ध्यान अपनी सरकार को गिरने से बचाने की ओर है तथा इस प्रक्रिया में सरकार ने राज्य के संसाधनों को अपने नेताओं पर खर्चा करना शुरू कर दिया है। यह कार्रवाई सरकारी खजाने पर दिन दहाड़े डकैती करने जैसा है।

उन्होंने कहा कि इन नियुक्तियों से सरकार में राजनीतिक नियुक्तियों की संख्या 26 हो गई है, जिनमें 12 सलाहकार, चार राजनीतिक सचिव, 9 विशेष कार्यवाहक अधिकारी तथा एक मुख्य संसदीय सलाहकार शामिल है। कांग्रेस पार्टी की सोच का दीवाला निकल गया है ।

श्री मजीठिया ने कहा कि ये नियुक्तियां गैरकानूनी तथा संवैधानिक नियमों के विरूद्ध है। सरकारी स्कूलों में 25 लाख छात्रों को मिड डे मील नहीं दिया जा रहा है, क्योंकि सरकार ने इसके लिए फंड जारी नही किए हैं। कांग्रेस सरकार पोषण महीना मनाने के लिए पांच सितारा होटलों में समागम कर रही है जबकि आंगनबाड़ी केंद्रों में जा रहे पांच लाख बच्चों को भोजन नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से दलित छात्रवृत्ति बंद करके काॅलेजों में दलित छात्रों की संख्या तीन लाख से कम होकर दो लाख रह गई है। माई भागों स्कीम के तहत् छात्राओं को निःशुल्क साइकिल भी नहीं दी जा रहीं । राज्य में आर्शीवाद योजना को लागू नहीं किया जा रहा तथा गरीब वर्ग की नव विवाहिताओं को शगुन देने से इंकार किया जा रहा है। इसी तरह समाज कल्याण स्कीमों जैसे आटा दाल स्कीम, बुढ़ापा पैंशन आदि को आडिट करने के नाम पर बंद कर दिया गया है।

शिअद नेता ने कहा कि सरकार ने पिछले तीन साल से क्षतिग्रस्त फसल के लिए मुआवजा जारी न करके अन्नदाता को भी नहीं बख्शा है। गन्ना उत्पादकों का 700 करोड़ रूपए का बकाया भी नहीं दिया गया है। अमरिंदर सरकार ने पूर्ण कर्जा माफी तथा आत्महत्या पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने से भी हाथ खड़े कर दिए हैं। सरकार घर घर नौकरी स्कीम लागू न करके तथा 2500 रूपए प्रति महीना बेरोजगारी भत्ता तक नहीं दे पा रही है ।

श्री मजीठिया ने कहा कि उद्योगों को पांच रूपए प्रति यूनिट बिजली देने का वादा किया गया था तथा उन्हें आठ रूपए प्रति यूनिट बिजली दी जा रही है। पिछले ढ़ाई साल के दौरान बिजली की दरों में 25 प्रतिशत की वृद्धि कर आम आदमी की कमर तोड़ दी है। पूर्ववर्ती अकाली सरकार में दलितों को दी जाने वाली आंशिक मुफ्त बिजली की सुविधा भी बंद कर दी है।

उन्होंने हाल ही में आई बाढ़ के कारण घर बार तथा फसलों का नुकसान उठाने वाले हजारों पंजाबियों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए फंड जारी न करने के लिए सरकार की सख्त निंदा की। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल की बैठक सुलतानपुर लोधी आयोजित करना दिखावा मात्र है जबकि सरकार ने गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को मनाने के लिए एक भी रूपया जारी नहीं किया है।

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