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सब ठीक है के आगे : मुनिश्री विनय कुमार जी आलोक

हम किसी से मिलते ही पहली बात यही कहते हैं, आप कैसे हैं। कई बार हम इतनी जल्दी में होते हैं कि उसके ‘ठीक हैÓ वाले उत्तर को सुने बिना ही आगे बढ़ जाते हैं। बहुत समय नहीं हुआ, जब हम ‘ठीक हैं के साथ आगे-पीछे का पूरा हालचाल लिया करते थे। धीरे-धीरे हम ‘सब ठीक हैÓ पर सिमटते जा रहे हैं। हम दूसरों से व्यवहार करते हुए एक किस्म की दुनिया रच रहे होते हैं।

हम सबके लिए जैसी दुनिया बनाएंगे, उसी दुनिया का हिस्सा तो हम भी बन जाएंगे। अकेलापन, उदासी और अवसाद बढऩे के कारण की खोज करने जब हम निकलते हैं तो धीरे-धीरे अपने ही पास जाकर रुक जाते हैं। ये शब्द मनीषी संत मुनिश्री विनय कुमार जी आलोक ने सैक्टर 24सी अणुव्रत भवन तुलसी सभागार मे सभा को संबोधित करते हुए कहे।

मनीषी संत ने आगे कहा कल एक सज्जन मिलने आए। मैंने पूछा, बड़े भैया कैसे हैं। उन्होंने कहा सब ठीक ही होगा। काफी दिनों से बात नहीं हुई। मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ। मैंने स्पष्ट करते हुए कहा मैं आपके भैया की बात कर रहा हूं। उन्होंने कहा, हां मैं समझ गया। लेकिन मैं भी व्यस्त रहता हूं और वह भी। इसलिए कई बार बातचीत किए हुए महीनों हो जाते हैं। आपकी जानकारी के लिए बताता चलूं कि दोनों बैंकिंग सेक्टर में काम करते हैं। जहां रविवार की निश्चित रूप से और शनिवार की कुछ नियमों के साथ छुट्टी होती है।

मैंने बात बदलते हुए कहा, छुट्टी के दिन क्या करते हैं? उन्होंने कहा, अक्सर कहीं बाहर घूमने, शॉपिंग करने और फिल्म देखने में समय बीत जाता है। आप समझिए, अपने भाई से बात करने का वक्त नहीं मिल पा रहा है लेकिन खरीदारी, सिनेमा और घूमने के लिए पूरा समय है। भाई हमारी प्राथमिकता सूची से बाहर हो गया है। ऐसा उन्होंने कहा नहीं, लेकिन स्पष्ट रूप से हम समझ सकते हैं।

मनीषी संत ने कहा यह अकेले उनकी कहानी नहीं है, हम सब कुछ इसी तरह की जीवन शैली रच रहे हैं। अपने भाई, परिवार, माता-पिता, रिश्तेदार से बात किए हुए बिना हमारे दिन आसानी से बीतते रहते हैं। बहुत छोटी दुनिया में सिमटते जा रहे हैं। आपको बात थोड़ी विचित्र लग सकती है लेकिन सच तो यह है कि इसी वजह से हम बहुत से पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड, कर्ज से घिरते जा रहे हैं।

आचार्य श्री महाप्रज्ञ प्रेक्षा मेडिटेशन के पुरूषकर्ता: प्रशासक के सलाहकार परिदा
चंडीगढ प्रशासक के सलाहकार श्री मनोज परिदा से मनीषी संत मुनिश्री विनय कुमार जी आलोक ने आचार्य श्री महाप्रज्ञ जन्मशताब्दी वर्ष पर परिचर्चा की। श्री परिदा ने कहा जब से मै चंडीगढ़ आया हूं तब से कई बार प्रेक्षा मेडिटेशन कैंप की चर्चा की पर सही उत्तर नही मिला। मैने दिल्ली मे लगातार साधना केंद्र मे जाकर प्रेक्षा मेडिटेशन करता रहा हंंू और प्रयोगो मे भी सम्मलित होता रहा हूं और अब भी बराबर मैं प्रेक्षा मेडिटेशन करता हूं।

मुझे मेरे गुरू जी ने आचार्य श्री महाप्रज्ञ के द्वारा संचालित प्रेक्षा मेडिटेशन के बारे मे प्रेरणा दी थी। कई स्थानो पर मेडिटेशन करने गया लेकिन आचार्य महाप्रज्ञ द्वारा संचालित प्रेक्षा मेडिटेशन जैसा मुझे कही अच्छा नही लगा। आचार्य श्री महाप्रज्ञ एक नाम नही वह तो प्रेक्षा मेडिटेशन के पुरूषकर्ता है। प्रेक्षा मेडिटेशन आचार्य महाप्रज्ञ द्वारा पुरूषकृत है। आचार्य श्री महाप्रज्ञ जन्मशताब्दी वर्ष पर जो भी करनीय है मैं करूंगा क्योकि यह मेरा दायित्व भी ही है और कर्तव्य भी।

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