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मनोहर के प्री-बजट मंथन में 25 प्रतिशत माननीय रहे गैर-हाजिर

तीन दिवसीय चर्चा में बजट को बेहतर बनाने को लेकर विधायकों ने दिए सुझाव

पंचकूला। मनोहर सरकार ने अपने 2.0 कार्यकाल में बजट को मनोहारी बनाने के लिए पहली बार प्री-बजट चर्चा की नई परंपरा शुरू की गई। मगर माननीयों ने प्री-बजट चर्चा में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। तीन दिवसीय प्री-बजट चर्चा में 25 प्रतिशत माननीय गैर-हाजिर रहे। अलबत्ता इस आंकड़े से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जनता के नुमाइंदे जनहित के प्रति कितने गंभीर हैं।

बजट को प्रभावी व बेहतर बनाने के लिए पहली बार सरकार की ओर से पंचकूला में आयोजित तीन दिवसीय प्री-बजट चर्चा आयोजित की गई। बजट को बेहतर बनाने के लिए न केवल विधायकों से सुझाव मांगे गए बल्कि बेहतर सुविधाओं को अमलीजामा पहनाने की दिशा में कदम भी बढ़ाया गया।

पहले दिन कृषि और शिक्षा पर सुझाव मांगे गए। विधायकों ने सुझाव देने के बजाय एक-एक करके अपने हलकों की समस्याएं गिना दी। लिहाजा प्री-बजट चर्चा में सुझाव की बजाय माननीयों ने अपने हलकों की समस्याओं को गिनाने में ज्यादा गंभीरता दिखाई। दूसरे दिन खेल, स्वास्थ्य व सामाजिक मुद्दों पर सुझाव मांगे गए। मगर दूसरे दिन भी स्थिति यही रही कि विधायकों ने सुझाव देने की बजाय अपने अपने हलकों की समस्याएं ही गिनाई। हलकों की समस्याएं गिनाने के साथ भाजपा के विधायकों ने भी स्वास्थ्य पर चिंता जाहिर करते हुए डॉक्टरों की कमी को दूर करने का सुझाव दिया।

प्री-बजट चर्चा में पहले दिन यानि 17 फरवरी को 71 विधायकों ने हिस्सा लिया। जबकि 18 फरवरी को 74 विधायकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और 19 फरवरी यानि अंतिम दिन बुधवार को 70 विधायकों ने ही प्री-बजट चर्चा में हिस्सा लिया। अलबत्ता तीन दिन के विधायकों की मौजूदगी के आंकडों नजर डाली जाए तो तकरीबन 25 प्रतिशत विधायकों ने प्री-बजट चर्चा में कोई दिलचस्पी दिखाई। कांग्रेस के साथ भाजपा तथा सत्ता सहयोगी दल जजपा के विधायक भी प्री-बजट चर्चा के प्रति गंभीर नहीं दिखाई दिए। विधायकों की उपस्थिति को देखकर स्पष्ट है कि प्री बजट मंथन का कोई खास असर आगामी बजट में नहीं दिखाई देगा। इनेलो विधायक अभय चौटाला ने एक ही दिन बजट मंथन में हिस्सा। उन्होंने आरोप लगाया था कि जब बजट छप चुका है तो प्री-बजट चर्चा का कोई औचित्य नहीं है। यही आरोप पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी लगाए। हालांकि हुड्डा तीनों दिन चर्चा में मौजूद रहे, लेकिन कोई सुझाव नहीं दिया। यही नहीं उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला भी प्री-बजट चर्चा के प्रति ज्यादा गंभीर नजर नहीं आए। दूसरे दिन वे दोपहर बाद चर्चा में पहुंचे तो अंतिम दिन भी एक बजे के बाद ही चर्चा में हिस्सा लिया। इसके अतिरिक्त आदमपुर से कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई और तोशाम से विधायक किरण चौधरी तीनों दिन गैर-हाजिर रहीं।

ग्रामीण विकास के प्रति माननीयों ने दिखाई गंभीरता

प्री-बजट चर्चा में अंतिम दिन बुधवार को बिजली, जेल शहरी विकास और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर विधायकों ने अपने सुझाव रखे। ग्रामीण विकास को लेकर माननीय पूरे गंभीर दिखाई दिए। हर विधायक ने अपने क्षेत्र से लेकर प्रदेश से जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को लेकर बेहतर सुझाव दिए जो ग्रामीण अंचल की तस्वीर बदलने में काफी कारगर साबित हो सकते हैं। इंद्री विधायक रामकुमार गौतम ने सीएम सिटी करनाल की तर्ज पर पूरे हरियाणा को पालीथिन मुक्त करने का सुझाव दिया। इसके अतिरिक्त जिन ग्राम पंचायतों के पास पंचायती जमीन नहीं हैं, उनकी आय को बढ़ाने के लिए बजट में अतिरिक्त राशि आवंटित करने का सुझाव दिया। रामकुमार कश्यप ने ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए सामुदायिक केंद्रों के रखरखाव को लेकर बजट का प्रावधान करने की मांग उठाई। चरखीदादरी से निर्दलीय विधायक सोमवीर सांगवान ने कहा कि दिल्ली के डार्क जोन घोषित होने के बाद वहां से उद्योग धंधे हरियाणा में शिफ्ट हो रहे हैं। उन्होंने सरकार को भविष्य में होने वाली दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए इनके लिए एक अलग से नीति तैयार का सुझाव दिया। पटौदी से विधायक सत्यप्रकाश जरावता ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के गंदे पानी को प्रयोग में लाने के लिए चार-पांच गांवों के एक कलस्टर बनाकर वहां पर एसटीपी लगाया जाए ताकि उस पानी को खेती के लिए प्रयोग किया जा सके। उन्होंने ग्राम पंचायतों की नीति निर्धारण करने से पहले ग्राम सचिवों को विशेष ट्रेनिंग देने का सुझाव दिया ताकि सरकार की नीतियों के अनुसार योजनाएं तैयार हो सकें।

भाजपा केवल इवेंट मैनेजमेंट की सरकार : हुड्डा

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्री-बजट बैठक को इवेंट मैनेजमेंट करार दिया। उन्होंने कहा कि जब तक आर्थिक सर्वे न हो, बिना आर्थिक सर्वे और बिना विभागों के आवंटन के जरिये यह नहीं पता चल सकता है कि बजट किस दिशा में जाएगा। मंत्रियों के जिस तरह से ब्यान आ रहा है, उससे स्पष्ट है कि बजट बन चुका है।

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