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10 दिवसीय गणेश उत्सव शुरू: भगवान विष्णु ने भी थी सिद्धि विनायक की उपासना

Ganesh festival begins: भाद्रपद की शुक्ल चतुर्थी को 10 दिवसीय गणेश उत्सव की शुरूआत होती है, जो अनंत चतुर्दशी तक चलती है। इस बार 10 सितम्बर से यह पर्व प्रारंभ हो चुका है और 19 सितम्बर अनंत चतुर्दशी तक चलेगा। अर्थात इस बार गणपति 10 दिन तक भक्तों के घर में मेहमान बनकर रहेंगे।

इस दौरान गणपति जी के खासकर अष्ट रूपों की पूजा होती है। इन अष्ट विनायकों में महोत्कट विनायक, मयूरेश्वर विनायक, गजानन विनायक, गजमुख विनायक, सिद्धि विनायक, बल्लालेश्वर विनायक, वरद विनायक आदि शामिल हैं। इनके अलावा चिंतामन गणपति, गिरजात्म गणपति, विघ्नेश्वर गणपति, महागणपति आदि कई रूप भी हैं।

वैसे तो गणेश जी इन हर तरह के रूपों में अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और कृपा बरसाते हैं लेकिन उनका सिद्धि विनायक स्वरूप सबसे मंगलकारी माना गया है। सिद्धि विनायक उक्त रूपों में सिद्धि विनायक को सबसे मंगलकारी माना गया है। सिद्धटेक नामक पर्वत पर इनका प्राकट्य होने के कारण इनको सिद्धि विनायक कहा जाता है। मात्र इनकी उपासना से हर संकट और बाधा से तुरन्त ही मुक्ति मिल जाती है। कहते हैं कि सृष्टि निर्माण के पूर्व सिद्धटेक पर्वत पर भगवान विष्णु ने इनकी उपासना की थी। इनकी उपासना के बाद ही ब्रह्माजी सृष्टि की रचना बिना विघ्न के कर पाए।

यही विघ्नहर्ता भी हैं। सिद्धि विनायक का स्वरूप चतुर्भुजी है। सिद्धि विनायक के ऊपर के हाथों में कमल एवं अंकुश और नीचे के एक हाथ में मोतियों की माला और एक हाथ में मोदक से भरा पात्र है।

सिद्धि विनायक की पूजा से हर तरह के विघ्न समाप्त होते हैं और हर तरह के कर्ज से मुक्ति मिलती है। इनकी आराधना से घर-परिवार में सुख, समृद्धि और शांति स्थापित होती है और संतान की प्राप्ति होती है।

ऐसा मानना है कि जो भी व्यक्ति गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश जी को घर में? विराजमान करके उनकी पूजा करता है, भगवान गणेश उसके जीवन से सभी कष्टों को सदेव के लिये दूर कर देते हैं। घर की स्त्री गणपति जी की सच्चे दिल व मन से आराधना करती है तो परिवार की किसी भी कठिनाई को आसानी से बचा सकती है।

जब तक आपके घर में गणपति रहें, तब तक उनको भूलकर भी अकेला न छोड़े। यह सबसे बड़ा त्योहार है जो आमतौर पर दस दिनों तक मनाया जाता है।

गणपति उत्सव बहुत बड़ा है और सभी क्षेत्रों, भाषाई पृष्ठभूमि और धर्मों के लोग बहुत उत्साह और खुशी के साथ उत्सव में भाग लेते हैं। गणेश जी महाराज सभी देवताओं में सर्वप्रथम पूजनीय हैं।

किसी भी पूजा की शुरुआत भगवान गणेश की आराधना के साथ ही शुरू होती है। हिंदू धर्म में गणपति का महत्व बहुत अधिक होता है। हर महीने की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी का व्रत भक्त रखते हैं। लेकिन भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की गणेश चतुर्थी का महत्व खास होता है। युगों से चली आ रही गणेश महोत्सव की परम्परा आज भी उसी अंदाज व हर्षोल्लास के साथ पूरी की जाती है।

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