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यदि ज्ञान नहीं है तो कल्याण हो जाएगा पर ज्ञान पर श्रद्धान नहीं है तो कल्याण नहीं होगा : विभंजन सागर

If there is no knowledge then there will be welfare but there is no respect for knowledge, then welfare will not happen: Vibhyanjan Sagar

श्री मुनि सुव्रतनाथ दिगम्बर जैन त्रिकाल चौबीसी मन्दिर, आर के पुरम, कोटा, (राजस्थान) में श्रमण श्री विभंजन सागर जी मुनिराज ने अपने मंगल प्रवचन के माध्यम से बताया कि प्रवचनसार ग्रन्थ में ज्ञान पर जोर दिया गया है, ज्ञान पर महत्व दिया गया है इर आचार्य भगवन कह रहे है की यदि ज्ञान नहीं है तो कल्याण हो जायेगा पर ... Read More »

दिशा विपरीत हो तो मंजिल दूर हो जाती है : बाबा हरदेव जी

nirankari baba ji

जब हमारी दिशा विपरित हो जाये तो हम मंजिल से दूर हो जाते हैं, तब हम मंजिल के करीब नहीं आते हैं। मंजिल पर पहुंचना असंभव हो जाता है जब विपरीत दिशा की तरफ अपना चेहरा कर लिया जाता है। जैसे कोई परेड भी कराते हैं सेवादल वाले तो जवानों को आप देखते हैं कि वहाँ पर कॉशन मिल जाता ... Read More »

दान और पूजा करना श्रावक का मुख्य धर्म है : विभंजन सागर

If there is no knowledge then there will be welfare but there is no respect for knowledge, then welfare will not happen: Vibhyanjan Sagar

श्री मुनि सुव्रतनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर त्रिकाल चौबीसी, आर के पुरम, कोटा,  (राजस्थान) में आज श्रमण श्री विभंजन सागर जी मुनिराज ने अपने मंगल प्रवचन के माध्यम से बताया कि महावीर भगवान ने 2 धर्म का उपदेश दिया -श्रमण धर्म और श्रावक धर्म। श्रमण धर्म को अपना धर्म पालन करने के लिए 6 कर्तव्य बताये है उसी प्रकार श्रावक को ... Read More »

अप्रिय, कटुक, कठोर शब्द नहीं, कोई मुख से कहा करे : विभंजन सागर

If there is no knowledge then there will be welfare but there is no respect for knowledge, then welfare will not happen: Vibhyanjan Sagar

श्री मुनि सुव्रतनाथ दिगम्बर जैन त्रिकाल चौबीसी मन्दिर , आर के पुरम (राजस्थान) में श्रमण श्री विभंजन सागर जी मुनिराज के पावन सान्निध्य में आज सत्तरहवें तीर्थंकर कुन्थुनाथ भगवान का जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक दिवस बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मुनि श्री ने इस पावन अवसर पर मेरी भावना के अंतिम काव्य पर प्रवचन देते हुए बताया ... Read More »

त्रयोदशी का व्रत करने वाला व्यक्ति सदा सुखी रहता है : कृष्ण नारंग

कैथल (मोहित गुलाटी)। त्रयोदशी का व्रत करने वाला व्यक्ति सदा सुखी रहता है। त्रयोदशी का व्रत करने वाले को दो गायों को दान देने के समान फल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति के पाप धूल जाते हैं और उसे मोक्ष प्राप्त होता है। त्रयोदशी को लेकर एक पौराणिक तथ्य सामने आता है कि ... Read More »

परम अहिंसा धर्म जगत में, फैले सर्व हित किया करे : विभंजन सागर

If there is no knowledge then there will be welfare but there is no respect for knowledge, then welfare will not happen: Vibhyanjan Sagar

 श्री मुनि सुव्रतनाथ दिगम्बर जैन त्रिकाल चौबीसी मन्दिर, आर के पुरम, कोटा (राजस्थान) में श्रमण श्री विभंज नसागर जी मुनिराज ने मेरी भावना के ऊपर अपना मंगल प्रवचन देते हुए कहा के भक्त भगवान से प्रार्थना करता है और अपने विचारों से अपना परिचय देता है ।जब हम करुणा दया से भीग जाते है ,हृदय करुणा से भर जाता है ... Read More »

बाल कलाकारों ने भागवत कथा पर आधारित कार्यक्रम पेश किया

चंडीगढ़ (अप्रस)। श्री चैतन्य गोडीया मठ सेक्टर-20 चंडीगढ़ में 48 धर्म सम्मेलन का शुभारंभ सांस्कृतिक कार्यक्रम लाइट एंड साउंड शो की मठ के बाल कलाकारों द्वारा भागवत कथा पर आधारित नाटक रूपांतरण से प्रस्तुत कर रंगारंग कार्यक्रम पेश किया गया। मठ के सैकड़ों बाल कलाकारों ने भगवान की विभिन्न लीलाओं पर आधारित नाटक प्रस्तुत किए। हजारों लोगों की उपस्थिति में ... Read More »

घर -घर चर्चा रहे धर्म की, दुष्कृत दुष्कर हो जावे : विभंजन सागर

श्री मुनि सुव्रतनाथ दिगम्बर जैन त्रिकाल चौबीसी मन्दिर, आर के पुरम, कोटा (राजस्थान) में श्रमण श्री विभंजन सागर जी मुनिराज ने मेरी भावना के माध्यम से प्रवचन देते हुए कहा कि पवित्र भावना ही संसार में कल्याण सूत्रों को विकशित करती है। मेरी भावना पं. जुगल किशोर मुक्तार जी द्वारा रचित जिसमें सभी की कल्याण की भावना और सभी की ... Read More »

उनके लिए लोहे की सलाखें पिंजरा नहीं बना पातीं है : निरंकारी बाबा जी

sant nirankari baba ji

प्रेम किन्ही बाधाओं को मान्य नहीं करता। पत्थर की दीवारें जेल नहीं बनाती न ही लोहे की सलाखें पिंजड़ा बनाती हैं। जिन्होंने इस सत्य का अहसास करलिया है, जिनकी आत्मा ओर दिल प्रकाशित हो चुके हैं, जिन्होंने अब परमसत्यए सार्वभौमिक सत्य को जान लिया है उनके लिए पत्थर की दीवारों का महत्व नहीं है। वे उन पूर्वाग्रही धारणाओं में नहीं ... Read More »

सुखी रहे सब जीव जगत के कोई कभी न घबराए : विभंजन सागर

arthaprkash news,

श्री मुनि सुव्रतनाथ दिगम्बर जैन त्रिकाल चौबीसी मन्दिर, आर के पुरम, कोटा (राजस्थान) में श्रमण श्री विभंजन सागर जी मुनिराज ने मेरी भावना के ऊपर अपना प्रवचन देते हुए कहा कि आत्मा की उन्नति ,उत्थान जिन गुणों से होती है उन गुण रूपी मोतियों को परस्पर पिरोकर पं. जुगल किशोर मुक्तार जी ने मेरी भावना रूपी माला पिरो दी, उस ... Read More »

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