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पेड पार्किंग को लेकर ठेका कंपनी को टर्मिनेट, करने का अधिकार कमिश्नर को

पेड पार्किंग को लेकर ठेका कंपनी को टर्मिनेट, करने का अधिकार कमिश्नर को

मेयर ने कमिश्नर को दिया अधिकार, सूद व अन्य पार्षदों में तू-तू मैं-मैं

चंडीगढ़। (वीरेन्द्र सिंह)- मेयर और पार्किंग ठेकेदार के बीच सम्मान की प्रतीक बनी पेड पार्किंग की लड़ाई का अंत उस समय हो गया,जब निगम सदन की विशेष बैठक के दौरान मेयर ने उक्त कंपनी को 10 दिन का नोटिस देकर इसे टर्मिनेट करने का अधिकार कमिश्नर को दे दिया। एजेंडों के पूर्व पार्षदों के जोर देने पर मेयर ने पहले इस बहुचर्चित मामले पर बहस शुरू करवाई। लगभग चार घंटों की लंबी बहस और पार्षदों के बहुमत के बाद मेयर ने कड़ा फैसला लेते हुए कंपनी को टर्मिनेट करने का अधिकार कमिश्नर को दिया।

चर्चा का विषय है कि निगम के ला आफीसर एंड ज्वाइंट कमिश्नर और कमिश्नर के विचार जानने के बाद कि सदन को उक्त एमओयू को निरस्त करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। फिर भी इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। क्या यह कानून का उल्लंघन तो नहीं? पूर्व मेयर अरुण सूद ने भी कानून का हवाला देकर बार-बार कहा कि सदनको उक्त ठेकेदार कंपनी का कांट्रेक्ट रद्द करने का कानूनी अधिकार है ही नहीं। सदन केवल अपनी राय दे सकता है, आदेश नहीं। ऐसे में इस निर्णय पर सवालिया निशान लगता है कि आखिरकार इसमें कौन सा ऐसा पेंच है, जो सदन को इस अधिकार से वंचित करता है।

नगर के पूर्व सांसद एवं भारत सरकार के असिस्टेंट सालिस्टर जनरल सत्यपाल जैन से इस पर चर्चा की गयी। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ऐसा ही होता है। सदन प्रस्ताव पारित कर कमिश्नर को भेजता है, कमिश्नर इस कार्यान्वित करता है। उनके अनुसार स्पष्ट है कि कंपनी को 10 दिनों के नोटिस पर टर्मिनेट कर दिया जाएगा। किन्तु सूद के अनुसार एमओयू के क्लाज के तहत ऐसा करने का अधिकार ही नहीं है। सदन या कमिश्नर केवल शर्ते पूरी न होने पर कंपनी को वित्तीय जुर्माना कर सकते हैं।

ज्वाइंट कमिश्नर तेजदीप सैनी ने भी स्पष्ट किया कि एमओयू के अनुसार कंपनी को टर्मिनेट नहीं किया जा सकता है। इसके बाद सभी पार्षद सीट से खड़े होकर एक स्वर में इसका विरोध करने लगे। बाद में मेयर ने फैसला लिया।  बता दें कि इस मामले पर भाजपा में भी एकमत नहीं दिखा। अरुण सूद और कंवरजीत राणा,सूद व अनिल दुबे सूद व राजबाला मलिक के बीच कई बार तू-तू मैं-मैं की नौबत आयी। किन्तु सूद अपनी बात पर अड़े रहे। इसके पूर्व सुबह गत बैठक के एजेंडे को कन्फर्म करने के बाद शून्य काल पर चर्चा होनी थी।

मेयर के हस्तक्षेप के बाद सीधी पेड पार्किंग के मुद्दे पर ही फोकस रखा गया। मेयर ने कहा कि कानून अपनी जगह है, किन्तु शहर की जनता और निगम के हितों की वह किसी भी कीमत पर अनदेखी नहीं कर सकते हैं। उन्होंने पेमेंट लेट करने पर कंपनी को नोटिस दिया था। आगामी दो-तीन में १५ दिन हो जाएंगे। उसके बाद मेयर को कंपनी को टर्मिनेट करने की शक्ति स्वत: ही और कानूनन मिल जाती है। मेयर द्वारा गठित पांच मेंबरी कमेटी की अलग-अलग रिपोर्ट पढ़कर सुनायी गयीं। राजबाला मलिक,  गुरबक्श रावत, महेशइंदर सिंह ने अपने अकाट्य तर्कों के साथ कंपनी की वायलेशन को उजागर किया। खबर लिखे जाने तक निगम सदन की बैठक जारी थी, जिसमें कुल ६ एजेंडों पर चर्चा होनी थी।

कांग्रेस का प्रदर्शन, नारेबाजी-

चंडीगढ़। पेड पार्किंग के बढ़े रेट के विरुद्ध चंडीगढ़ कांग्रेस की तरफ से आज जोरदार आज सुबह ९ बजे से ही कांग्रेस के कार्यकर्ता निगम के समक्ष रोड किनारे बैठकर भाजपा सरकार के विरुद्ध नारेबाजी की। पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल, पूर्व मेयर सुभाष चावला, पूर्व मेयर व पार्टी प्रधान प्रदीप छाबड़ा, हरफूल चन्द्र कल्याण, एचएस लक्की, पूर्व मेयर कमलेश बनारसी दास सहित दर्जनों नेता दर वृद्धि के विरुद्ध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने हाथ में तख्तियां ले रखी थीं, जिन पर रेट वृद्धि की सीबीआई जांच की मांग हो लिखा था। इसमें कांग्रेस के पार्षदों ने भी भाग लिया।

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