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सरकारी स्कूलों में चार लाख बोगस प्रवेश के मामले में हाईकोर्ट ने तलब की रिपोर्ट –

सरकारी स्कूलों में चार लाख बोगस प्रवेश के मामले में हाईकोर्ट ने तलब की रिपोर्ट –

चंडीगढ़। सरकारी स्कूलों में 4 लाख बोगस प्रवेश दिखाने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने विजिलेंस की जांच रिपोर्ट तलब कर ली है। हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि मार्च तक यदि विजिलेंस अपनी रिपोर्ट दाखिल नहीं करेगी तो डायरेक्टर विजिलेंस को खुद हाजिर होकर जवाब देना होगा। इससे पहले हाई कोर्ट ने जांच विभाग से लेकर विजिलेंस को सौंपने का निर्णय लिया था और विजिलेंस को शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट दाखिल करनी थी। विजिलेंस के रिपोर्ट दाखिल न करने पर अब हाई कोर्ट ने मार्च तक का समय दे दिया है। मामला 2016 का है, जब गेस्ट शिक्षकों को बचाने के लिए हरियाणा सरकार ने अपील दाखिल की थी। इस दौरान कोर्ट के सामने कुछ चौकाने वाले आंकड़े सामने आए थे। कोर्ट ने पाया था कि 204-15 में सरकारी स्कूलों में 22 लाख छात्र थे, जबकि 2015-16 में इनकी संख्या घटकर मात्र 18 लाख रह गई थी। हाई कोर्ट ने इस पर हरियाणा सरकार से पूछा था कि अचानक 4 लाख बच्चे कहां गायब हो गए जिस पर हरियाणा सरकार संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई थी। इस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया था कि 4 लाख फर्जी दाखिले कर सरकारी राशि हड़पने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसके लिए सरकार अधिकारियों की एक कमेटी बनाए जो यह देखें कि फर्जी दाखिले फंड का हड़पने के लिए थे या सरप्लस गेस्ट टीचर को बचाने के लिए। इस मामले में सीनियर आईपीएस अधिकारी को जांच का जिम्मा सौंपने के आदेश दिए गए थे। इसके स्थान पर रिटायर सेशन जज को जांच का जिम्मा सौंप दिया गया था जिस पर हाईकोर्ट ने सरकार को फिर खरी-खरी सुनाई थी। हाईकोर्ट द्वारा इस मामले की जांच करवाने के आदेश के बाद भी जांच न होने पर कोर्ट में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को तलब किया था। एसीएस ने हाई कोर्ट में आकर अपना पक्ष रखा जिस पर असंतोष जताते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि वो दोषी अधिकारियों को बचा रहे हैं, ऐसे में कोर्ट को अब शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर भरोसा नही हैं। प्रतिवादी पक्ष के वकील जगबीर मलिक ने इस पूरे मामले की जांच सीबीआइ से करवाने की मांग की थी। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल को तलब किया था और पूछा था कि अब कोर्ट को शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर भरोसा नहीं है तो यह बताया जाए कि इस मामले निष्पक्ष जांच किस एजेंसी से करवाई जाए। एजी ने कोर्ट को विजिलेंस से इस मामले की जांच करने की सलाह दी थी। हाई कोर्ट ने एजी की सलाह पर मामले की जांच विजिलेंस को सौंपते हुए निर्देश दिया था कि इस मामले की जांच एसपी स्तर के अधिकारी करे व उनको सहयोग के लिए शिक्षा निदेशालय के दो अधिकारी उनको सहयोग करे। अब इस मामले की जांच रिपोर्ट तलब कर ली गई है।

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