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एनआरआई के लिए आधार की प्रासंगिकता के बारे दिशा निर्देश जारी-

चंडीगढ़ (अप्रस)। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने प्रवासी भारतीयों (एनआरआई),भारतीय मूल के व्यक्तियों (पीआईओ) और भारत के विदेशी नागरिकों (ओसीआई) के लिए पहचान दस्तावेज के रूप में आधार की प्रासंगिकता के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के एक प्रवक्ता ने यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि यूआईडीएआई द्वारा जारी एक परिपत्र में कहा गया है, ”आधार एक पहचान दस्तावेज है जो केवल उन लोगों से मांगा जा सकता है जो आधार अधिनियम, 2016 के अनुसार इसके लिए योग्य हैं। ÓÓ
प्रवक्ता ने बताया कि हो सकता है कि अधिनियम के अनुसार अधिकतर एनआरआई, पीआईओ और ओसीआई आधार नामांकन के लिए पात्र न हों। एनआरआई, पीआईओ और ओसीआई से कई प्रतिवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें विभिन्न सेवाओं और लाभों के संबंध में सम्बन्धित प्राधिकारियों द्वारा आधार मांगने पर उन्हें पेश आने वाली कठिनाइयों के बारे में बताया गया है। उन्होंने कहा कि यह ध्यान में लाया गया है कि कुछ विभाग और संबंधित कार्यान्वयन एजेंसियां उनसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी सेवाओं और लाभों के लिए एनआरआई, पीआईओ और ओसीआई पर उनके आधार जमा करवाने या लिंक करवाने पर जोर दे रही हैं जबकि वास्तविकता यह है कि हो सकता है कि वे आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभों और सेवाओं की लक्षित प्रदायगी) अधिनियम, 2016 के अनुसार आधार के लिए पात्र ही न हों।
उन्होंने बताया कि आधार अधिनियम, 2016 में स्पष्टï है कि ”प्रत्येक निवासी नामांकन प्रक्रिया के तहत अपनी जनसांख्यिकीय जानकारी और बायोमेट्रिक जानकारी जमा करवाकर आधार संख्या प्राप्त करने का हकदार होगा।ÓÓ आगे आधार अधिनियम की धारा 2 (5) में ‘निवासीÓ को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है जो नामांकन के लिए आवेदन की तिथि से पहले के 12 महीनों में 182 दिनों या उससे अधिक की अवधि के लिए भारत में रह चुका हो।
उन्होंने बताया कि सेवाएं या लाभ प्राप्त करने के लिए आधार जमा करवाने या लिंक करने से संबंधित कानून आधार अधिनियम, 2016 के अनुसार निवासी पर ही लागू होता है।
प्रवक्ता ने बताया कि हो सकता है कि आधार अधिनियम, 2016 के अनुसार अधिकतर एनआरआई,पीआईओ और ओसीआई आधार नामांकन के लिए पात्र न हों। हालांकि, कार्यान्वयन एजेंसियां ऐसे एनआरआई, पीआईओ और ओसीआई की स्थिति की वास्तविकता का पता लगाने के लिए एक मैकेनिज्म तैयार कर सकती हैं। उन्होंने बातया कि आधार अधिनियम की धारा 7 में यह प्रावधान है कि यदि किसी व्यक्ति को आधार संख्या जारी नहीं की गई है तो उस व्यक्ति को सब्सिडी, लाभ या सेवा की प्रदायगी के लिए पहचान के वैकल्पिक और व्यवहार्य माध्यम उपलब्ध करवाए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि विभिन्न अधिसूचनाओं और परिपत्रों के माध्यम से दोहराया गया है कि आधार प्राप्त करने की आवश्यकता केवल उन लोगों के संबंध में है जो आधार अधिनियम, 2016 के अनुसार इसके लिए हकदार हैं। इस संबंध में, मनी लांडरिंग (रिकॉर्ड्स का रखरखाव) की रोकथाम नियम, 2017 तथा आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139 एए, संदर्भ लिया जा सकता है, जिनमें स्पष्ट है कि बैंक खातों और पैन को लिंक करना, उन लोगों के लिए आवश्यक है जो आधार अधिनियम, 2016 के अनुसार आधार के लिए नामांकन करने के पात्र हैं ।
प्रवक्ता ने बताया कि सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रबंध निदेशकों, मुख्य प्रशासकों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, उपायुक्तों और राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुल सचिवों को इन निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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