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भाजपा  में बगावत :धवन का खुला पत्र  :

भाजपा में बगावत :धवन का खुला पत्र :

हाईकमान को भी भेजी प्रतियां, संजय टंडन पर खुलकर निकाली भड़ास-

चंडीगढ़। चंडीगढ़ भाजपा में महापौर के चुनाव में मचा घमासान जहां देवेश मोदगिल की जीत के बाद लग रहा था कि थम जाएगा, लेकिन पार्टी के भीतर जिस किस्म के आरोप-प्रत्यारोप उभर कर आने शुरू हुए हैं, उसके स्पष्ट संकेत हैं कि आने वाले दिनों में पार्टी के अंदर मचा घमासान जल्दी से शांत होने वाला नहीं है।  हाल ही में जिस प्रकार बागियों के एक-एक करके पर्दा उठने शुरू हुए हैं कि बागियों की चुनावों से पूर्व पहाड़ों में जाने की योजना थी और विपक्ष कांग्रेस के साथ मिलकर अधिकृत प्रत्याशी देवेश मोदगिल को हराकर धूल चटानी थी। वहीं अब पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन ने पार्टी प्रभारी प्रभात झा को एक पत्र के जरिए बम फोड़ते हुए पार्टी अध्यक्ष संजय टंडन के पर्दे खोलकर रख दिए हैं। लिखे गये पत्र की प्रतियां आला कमान श्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, श्री नरेंद्र मोदी जी, प्रधानमंत्री, श्री रामलाल जी, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, श्रीमती किरण खेर, सांसद, श्री सत्यपाल जैन जी, श्री दिनेश शर्मा, संगठन मंत्री को भी भेजी गई है।  पाठकों की जानकारी के लिए हरमोहन धवन द्वारा लिखे गए पत्र हम ज्यों का त्यों प्रकाशित कर रहे हैं। श्रीमान प्रभात झा साहबप्रभारी, (चंडीगढ़  भाजपा)   नमस्कार, मैंने आपके द्वारा एक अख़बार में दिया बयान पढ़ा है जिसमें मेरे ऊपर आपने कई टिप्पणियां की और आरोप भी लगाए हैं, जो कि बिल्कुल ही निराधार हैं। झा साहब बहुत ही अच्छा होता अगर आप मेरा स्पस्टीकरण भी मांग लेते। आठ जनवरी को तमाम समाचार पत्रों के हेडलाइन मांफीनामा छपा। इससे पार्टी की खूब फजीहत हुई और पार्टी की छवि भी धूमिल हुई है। झा साहब मेरे उपरोक्त लिखे तथ्यों पर क्या आप अब भी चुप ही रहेंगे या श्री संजय टण्डन पर कोई कार्रवाई कर उन्हें अध्यक्ष पद से हटाएंगे भी?  या नहीं। झा साहब मैं जय प्रकाश नारायण जी के आंदोलन से प्रेरित होकर राजनीति में आया और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री चंद्रशेखर जी के साथ जुड़ गया था। राजनीति में हमें दो बातें सिखाई गईं थीं। एक तो जब आप विपक्ष में रहें तो जनता को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करें, दूसरी ये जब आप सत्ता में हों तो अपनी कलम की ताकत से जनहित में काम करें और मैं इन दोनों ही कसौटियों पर खरा उतरा। विपक्ष में रहते हुए मैंने आम आदमी के साथ-साथ गरीबों के लिए संघर्ष करते हुए 10 बार जेल गया, और जब वर्ष1989 में सत्ता में आया तब  सांसद और मंत्री बनने के बाद मैंने समाज के हर वर्ग गावों, कालोनियों, व्यापारियों, कर्मचारियों के अलावा हर वर्ग के लिए विकास कार्य किया, जो कि एक रिकॉर्ड है, और जनता  के दिलों दिमाग में आज भी ताज़ा है। मुझे खेद है के मैंने अपने 40 साल की राजनीतिक जीवन में ऐसी घटिया, छल, कपट और झूठ की राजनीति कभी भी नहीं देखी।   झा साहब मुझे मान सम्मान देना तो दूर की बात पिछले एक वर्ष से मुझे न तो कोर कमेटी की किसी भी बैठक में और न ही पार्टी के दूसरे अन्य कार्यक्रमों की सूचना न देकर मुझे अपमानित किया जा रहा है। आपने मेरे ऊपर जो अनुशासनत्मक कारवाई करने के संकेत दिए है। इस पर मुझे इतना ही कहना है कि अगर मुझे पार्टी से निष्काषित करके पार्टी मजबूत होती है तो मुझे बहुत ही ख़ुशी होगी। धन्यवाद  भवदीय (हरमोहन धवन)

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