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किडनी ट्रांसप्लांट में आवश्यकता और आपूर्ति के बीच विशाल अंतर-

किडनी ट्रांसप्लांट में आवश्यकता और आपूर्ति के बीच विशाल अंतर-

चंडीगढ, 7  जनवरी: संभावित अंगदानी में जागरूकता और अनुपलब्धता की कमी के कारण, हर साल करीब 5000 मरीजों में किडनी ही ट्रांसप्लांट हो पा रही है। आवश्यकता और आपूर्ति के बीच इस विशाल अंतर को तभी पूरा किया जा सकता है जब ब्रेन डेड, हादसों में मृतकों के अंगों (लगभग 4 लाख हर साल) से अंग प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध करवाए जाते हैं।’’
अत्याधुनिक किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट की शुरुआत के मौके पर डॉ.नीरज गोयल, कंसल्टेंट-यूरोलॉजिस्ट, लैप्रोस्कोपिक और ट्रांसप्लांट सर्जन , अलकेमिस्ट हॉस्पिटल ने बताया कि डायबटीज (मधुमेह) और हायपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) की बढ़ती समस्या के चलते, हमारे देश में 2 लाख से अधिक नए रोगियों में गुर्दे की विफलता (सीआरएफ) हर साल विकसित होती है।

पंचकूला में अत्याधुनिक किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट की शुरुआत हरियाणा के इस क्षेत्र में पहली और एकमात्र प्रत्यारोपण सुविधा अलकेमिस्ट हॉस्पिटल, पंचकूला में आज अत्याधुनिक किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट की शुरुआत की गई। यह यूनिट हरियाणा के इस क्षेत्र में पहली और एकमात्र ट्रांसप्लांट सुविधा है, जो हरियाणा, हिमाचल, पंजाब, जम्मू और कश्मीर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के आस-पास के इलाकों के रोगियों की जरूरतों को पूरा करेगी।
यूनिट का संचालन एक सक्षम टीम द्वारा किया जाएगा जिसमें डॉ.नीरज गोयल, कंसल्टेंट-यूरोलॉजिस्ट, लैप्रोस्कोपिक और ट्रांसप्लांट सर्जन, डॉ. रमेश कुमार और डॉ. चरणजीत लाल, दोनों कंसल्टेंट-नैफ्रोलोजिस्ट और डॉ. राजीव गोयल, कंसल्टेंट, यूरोलॉजिस्ट शामिल होंगे।
इस नई शुरुआत के मौके पर डॉ. नीरज ने कहा कि डायबटीज (मधुमेह) और हायपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) की बढ़ती समस्या के चलते, हमारे देश में 2 लाख से अधिक नए रोगियों में गुर्दे की विफलता (सीआरएफ) हर साल विकसित होती है। हालांकि, संभावित अंगदानी में जागरूकता और अनुपलब्धता की कमी के कारण, हर साल करीब 5000 मरीजों में किडनी ही ट्रांसप्लांट हो पा रही है। आवश्यकता और आपूर्ति के बीच इस विशाल अंतर को तभी पूरा किया जा सकता है जब ब्रेन डेड, हादसों में मृतकों के अंगों (लगभग 4 लाख हर साल) से अंग प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध करवाए जाते हैं।’’
डॉ. रमेश कुमार कंसल्टेंट-नैफ्रोलोजिस्ट ने बताया कि कैसे किडनी दाता की अदला-बदली और एबीओ-रक्त समूह से इनकम्पेटेबल डोनर ट्रांसप्लांट्स जैसे बेहतर विकल्प को अपनाया जा सकता है। इन दिनों इन विकल्पों से कम अवधि और लंबी अवधि के बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
डॉ. चरणजीत लाल, कंसल्टेंट-नैफ्रोलोजिस्ट ने कहा कि सीआरएफ मुख्य रूप से डायबटीज, हायपरटेंशन, बार-बार होने वाला संक्रमण, लंबे समय तक मूत्र बाधा, स्टोन रोग और कुछ अन्य असामान्यताओं के कारण  किडनी को अपूर्ण क्षति होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब तक, किडनी ट्रांसप्लांट, ईएसआरडी से प्रभावित मरीज के लिए उपलब्ध सबसे अच्छा इलाज विकल्प है।
डॉ. राजीव गोयल, कंसल्टेंट, यूरोलॉजिस्ट ने विस्तार से बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में कई कानूनी औपचारिकताओं पूरी करने की आवश्यकता होती है। हमारे देश के कानून के मुताबिक, किडनी दान केवल एक मेडिकल तौर पर पूरी तरह से तंदरूस्त ‘निकट संबंधी’ (भाई-बहन, माता-पिता, पति या पत्नी या बच्चों द्वारा) किए जाने की अनुमति है। किसी निकट संबंधी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किडनी दान के लिए संबंधित राज्य सरकार की अनुमति की जरूरत होती है। किसी विदेशी नागरिक के मामले में उस देश के दूतावास और विदेश मंत्रालय की अनुमति की जरूरत होती है।
इस दौरान , किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट हरियाणा के इस क्षेत्र में पहली और एकमात्र ट्रांसप्लांट सुविधा है, जो हरियाणा, हिमाचल, पंजाब, जम्मू और कश्मीर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के आस-पास के इलाकों के रोगियों की जरूरतों को पूरा करेगी।
यूनिट का संचालन डॉ.नीरज गोयल, डॉ. रमेश कुमार ,  डॉ. चरणजीत लाल और डॉ. राजीव गोयल, कंसल्टेंट, यूरोलॉजिस्ट करेंगे । डॉ.नीरज गोयल, यूरोलॉजी और ट्रांसप्लांट सर्जरी के क्षेत्र में एक जाने माने सर्जन के तौर पर जाने जाते हैं। उन्होंने पूरे भारत में सर्वश्रेष्ठ केंद्रों पर सर्वश्रेष्ठ किडनी ट्रांसप्लांट्स के परिणामों के साथ बड़ी संख्या में किडनी ट्रांसप्लांट्स की हैं। डॉ. रमेश कुमार और डॉ. चरणजीत लाल दोनों ही इस क्षेत्र के अनुभवी नैफ्रोलॉजिस्ट हैं और वे सभी प्रकार के किडनी ऑलोग्रेट रिजेक्शंस सहित मुश्किल ट्रांसप्लांट्स करते हुए लगातार सफलताएं प्राप्त कर चुके हैं। डॉ. राजीव ने प्रतिष्ठित संस्थान, एसजीपीजीआई लखनऊ में प्रशिक्षिण प्राप्त किया है।

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